Rajya Sabha Poll Results: राज्यसभा चुनाव में एक बार फिर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर अपनी श्रेष्ठता साबित की। सोमवार को हुए चुनावों में एनडीए ने बिहार की सभी पांच राज्यसभा सीटों पर जीत हासिल की, साथ ही ओडिशा में भी क्रॉस-वोटिंग के जरिए दो सीटें अपने नाम कीं। हरियाणा में भी सियासी ड्राम के बीच बीजेपी ही भारी पड़ी। बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए के जीतने वाले उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन शामिल थे। शाम को मतदान समाप्त होने के बाद गठबंधन के पीटीआई सूत्रों ने दावा किया कि एनडीए के सभी 202 विधायकों ने मतदान किया।
बिहार में NDA का परचम लहराया
परिणामों के अनुसार, नीतीश कुमार को 44 विधायकों का समर्थन मिला, जबकि नितिन नबीन को भी 44 विधायकों का समर्थन हासिल हुआ। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा को 42 विधायकों के वोट मिले, और रामनाथ ठाकुर को भी 42 विधायकों का समर्थन मिला। पांचवीं सीट पर पेंच फंसा हुआ था। इसमें भी भाजपा उम्मीदवार शिवेश कुमार ने आरजेडी उम्मीदवार एडी सिंह को दूसरी वरीयता के आधार पर हराया। शिवेश कुमार को कुल 4,202 वोट मिले, जबकि एडी सिंह को कुल 3,700 वोट मिले।

नीतीश कुमार की नई पारी
एडी सिंह को 37 प्रथम वरीयता वोट मिले, जबकि शिवेश कुमार ने 30 प्रथम वरीयता वोट हासिल किए। हालांकि, द्वितीय वरीयता वोटों की गिनती के बाद शिवेश कुमार के वोटों की संख्या में बढ़ोतरी हुई, जबकि एडी सिंह को एक भी द्वितीय वरीयता वोट नहीं मिला। राज्य में गठबंधन में नीतीश कुमार की जेडीयू, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (धर्मनिरपेक्ष) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा चुनाव में पांच उम्मीदवारों में से एक हैं।
विपक्षी महागठबंधन लड़खड़ाता हुआ दिखा
हालांकि, मतदान प्रक्रिया के दौरान विपक्षी महागठबंधन लड़खड़ाता हुआ दिखाई दिया, क्योंकि कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक विधायक मतदान में अनुपस्थित रहे। यह ऐसे वक्त पर हुआ जब एआईएमआईएम और बसपा जैसी विपक्षी गठबंधन से अलग पार्टियां भी विधानसभा में मौजूद थीं। बिहार विधानसभा में पांच विधायकों वाली एआईएमआईएम और बसपा के एकमात्र विधायक ने कहा कि उन्होंने आरजेडी उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के पक्ष में मतदान किया। सूत्रों का कहना है कि अगर ये विधायक मौजूद होते, तो उनका समर्थन विपक्ष को राज्यसभा की एक सीट जीतने में मदद कर सकता था। बिहार में राज्यसभा चुनाव के फार्मूले के अनुसार, अगर सभी 243 विधायक मतदान में भाग लेते, तो प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 41 वोटों की आवश्यकता होती।

राज्यसभा चुनाव नतीजे
ओडिशा में बीजेपी पड़ी भारी
इस बीच, द्विवार्षिक चुनावों के दौरान विपक्षी विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग के बाद एनडीए ने ओडिशा में भी राज्यसभा की दो सीटें हासिल कीं। ओडिशा में हर दो साल में होने वाले राज्यसभा चुनावों के परिणाम सोमवार को घोषित किए गए, जिसमें चार उम्मीदवारों ने उच्च सदन में सीटें हासिल कीं। यह चुनाव बेहद कड़ा था जिसमें क्रॉस-वोटिंग और राजनीतिक दांव-पेच देखने को मिले।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल ने सीट जीतकर भारतीय जनता पार्टी के लिए राज्य से अपनी राष्ट्रीय उपस्थिति मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उनकी जीत को ओडिशा में पार्टी की संगठनात्मक शक्ति के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है। भाजपा के एक अन्य उम्मीदवार और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार भी दोबारा निर्वाचित हुए, जिससे संसद में ओडिशा से पार्टी का प्रतिनिधित्व और मजबूत हुआ।
दिलीप राय की जीत बनी चर्चा का विषय
वहीं, एक अहम घटनाक्रम में अनुभवी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की। कई बीजेडी और कांग्रेस विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग की खबरों के बीच उनकी सफलता ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना दिया है, क्योंकि राज्यसभा चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत असामान्य है। बीजेडी सूत्रों ने संकेत दिया कि लगभग आठ पार्टी विधायकों ने उनके पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की होगी, जिससे परिणाम प्रभावित हुआ।
बीजू जनता दल से संतृप्त मिश्रा ने जीत हासिल की, जिससे क्षेत्रीय पार्टी की राज्यसभा में उपस्थिति सुनिश्चित हुई। ओडिशा की चार सीटों के लिए हुए चुनाव में भारी गहमागहमी देखने को मिली, जिसमें मतपत्र विवाद और प्रभाव डालने के प्रयासों के आरोपों के कारण मतदान में संक्षिप्त विराम भी शामिल था।
हरियाणा में हुआ भारी सियासी ड्रामा
वहीं, हरियाणा में चुनाव के दौरान भारी ड्रामा देखने को मिला। मतदान की गोपनीयता भंग होने के आरोपों के बीच हुए बहुचर्चित चुनावों में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध ने राज्यसभा की दो सीटों पर जीत हासिल की। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने देर रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं को उनकी जीत पर बधाई दी। अधिकारियों ने बताया कि पांच वोट अमान्य घोषित किए गए, चार कांग्रेस के और एक भाजपा का।
इन दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में थे। भाजपा के भाटिया (58), कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध (61) और निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नंदाल (63)। भाजपा समर्थित नंदाल ने 2019 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी। निर्दलीय उम्मीदवार द्वारा प्राप्त कुल वोटों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि नंदाल कांग्रेस उम्मीदवार से बहुत कम अंतर से हारे। सैनी ने दावा किया कि पांच कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायकों के चार वोट अमान्य घोषित किए गए।
हरियाणा के प्रभारी कांग्रेस महासचिव बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि क्रॉस-वोटिंग करने वाले और कांग्रेस के साथ विश्वासघात करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। क्रॉस-वोटिंग करने वाले कांग्रेस विधायकों के बारे में भूपिंदर सिंह हुड्डा ने पत्रकारों से कहा, मैं उनके नाम नहीं लूंगा, लेकिन लोगों को समझ आ गया है और वे इसका बदला लेंगे। साथ ही, हुड्डा ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने हर तरह की चाल चली। लेकिन कांग्रेस ने 'अग्नि परीक्षा' (एक सीट जीतकर) पास कर ली है।
