महाराष्ट्र सदन मनी लॉन्ड्रिंग केस: छगन भुजबल को बड़ी राहत, विशेष अदालत ने किया बरी; इतने करोड़ की रिश्वत के थे आरोप
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 23, 2026, 05:34 PM IST
मुंबई की एक अदालत ने महाराष्ट्र सदन निर्माण सौदे से जुड़े धनशोधन मामले में राकांपा मंत्री छगन भुजबल को बरी किया। यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू किया गया था। इसी केस से जुड़े ACB मामले में 2021 में ही छगन भुजबल, उनके बेटे पंकज, भतीजे समीर और पांच अन्य आरोपियों को बरी किया जा चुका है।
NCP नेता छगन भुजबल
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल को शुक्रवार को विशेष अदालत से बड़ी कानूनी राहत मिली। मुंबई की विशेष अदालत ने महाराष्ट्र सदन निर्माण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भुजबल और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। यह मामला वर्ष 2005-06 के दौरान नई दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन के निर्माण से जुड़ा है। उस समय छगन भुजबल महाराष्ट्र सरकार में लोक निर्माण विभाग मंत्री थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने नियमों को दरकिनार कर नई दिल्ली में महाराष्ट्र सदन के निर्माण का ठेका एक निजी कंपनी को दिया था। इतना ही नहीं इसके एवज में उन्हें कथित तौर पर रिश्वत भी मिली थी।
प्रवर्तन निदेशालय ने लगाए थे रिश्वत के आरोप
मामले में उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने मामला दर्ज किया था। ईडी ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र सदन के निर्माण के बदले केएस. चमनकर कंस्ट्रक्शन कंपनी ने छगन भुजबल और उनके परिवार को कथित रूप से किकबैक दिया। एजेंसी के अनुसार, निर्माण कंपनी ने उन फर्मों को पैसे ट्रांसफर किए, जिनमें भुजबल के बेटे पंकज भुजबल और भतीजे समीर भुजबल डायरेक्टर थे। ईडी का यह भी दावा था कि महाराष्ट्र सदन की मूल लागत 13.5 करोड़ रुपये तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर करीब 50 करोड़ रुपये कर दिया गया। एजेंसी के मुताबिक, इस सौदे से निर्माण कंपनी ने करीब 190 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया और इसमें से लगभग 13.5 करोड़ रुपये भुजबल को रिश्वत के रूप में मिले।कोर्ट ने दी राहत
इस मामले में शुक्रवार को विशेष PMLA अदालत के जज सत्यनारायण रामजीवन नवंदर ने छगन भुजबल और अन्य आरोपियों को बरी किया। भुजबल के वकील ने बताया कि अदालत ने मामले में आगे ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया। जिसके आधार पर अदालत ने भुजबल और अन्य आरोपियों को राहत दी।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने दर्ज की थी एफआईआर
यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू किया गया था। गौरतलब है कि इसी केस से जुड़े ACB मामले में 2021 में ही छगन भुजबल, उनके बेटे पंकज, भतीजे समीर और पांच अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। कोर्ट के इस फैसले को छगन भुजबल के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।
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