Nana Patekar Kargil War Indian Army: प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर के अभिनय और देशभक्ति से हर कोई वाकिफ है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने केवल दूर से सेना का मनोबल ही नहीं बढ़ाया, बल्कि खुद 60 दिनों तक भारतीय सेना की क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के सदस्य के रूप में सीमा पर सेवाएं भी दी थीं। कुछ समय पहले आए एक इंटरव्यू में नाना पाटेकर के इस अभूतपूर्व देशभक्ति पूर्ण कदम और जमीनी परिस्थितियों के संस्मरण साझा किए गए हैं।
जॉर्ज फर्नांडिस से मांगी थी विशेष अनुमति
'द लल्लनटॉप' को दिए 2024 के एक इंटरव्यू में, पाटेकर ने बताया कि कैसे उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस से संपर्क किया और आखिरकार 'क्विक रिएक्शन टीम' (QRT) का हिस्सा बने। नाना पाटेकर ने बताया कि जब 1999 में कारगिल युद्ध छिड़ा, तो वे सीमा पर जाकर सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहते थे।
शुरुआती हिचकिचाहट: पहले अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से उन्हें अनुमति देने से मना कर दिया।
रक्षा मंत्री से संपर्क: इसके बाद नाना पाटेकर ने सीधे तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से बात की। पाटेकर नेशनल लेवल के राइफल शूटर रह चुके थे और उन्होंने अपनी फिल्म 'प्रहार' (1991) की तैयारी के दौरान मराठा लाइट इन्फेंट्री से कठोर सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया था।
विशेष अनुमति: उनके सैन्य प्रशिक्षण और निशानेबाजी के अनुभव को देखते हुए जॉर्ज फर्नांडिस ने उन्हें युद्ध क्षेत्र में जाने की विशेष मंजूरी दे दी।
द्रास, लेह और कुपवाड़ा में QRT के साथ बिताए 60 दिन
अनुमति मिलने के बाद नाना पाटेकर को भारतीय सेना की क्विक रिएक्शन टीम (QRT) में शामिल किया गया। वे लगभग 2 महीने (60 दिन) तक सीमावर्ती क्षेत्रों- द्रास, लेह, कुपवाड़ा, बारामूला और सोपोर में तैनात टुकड़ियों के साथ रहे।
इंटरव्यू में ऑपरेशनल सीक्रेट्स और सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए उन्होंने सेना की गोपनीय रणनीतियों पर विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया था, लेकिन कहा, 'कम से कम इतना तो हम अपने देश के लिए कर ही सकते हैं। सेना के साथ उन 60 दिनों को बिताना मेरे जीवन का सबसे गौरवशाली और संतोषजनक अनुभव था।'
76 किलो से 56 किलो: युद्ध क्षेत्र में घटा 20 किलो वजन
युद्ध क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और शारीरिक श्रम का जिक्र करते हुए नाना पाटेकर ने बताया कि जब वे श्रीनगर पहुंचे थे, तब उनका वजन 76 किलोग्राम था। लेकिन जब वे 60 दिनों के बाद वापस लौटे, तो अत्यधिक शारीरिक मेहनत और विपरीत मौसम के कारण उनका वजन घटकर 56 किलोग्राम (20 किलो कम) रह गया था।
