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मप्र: छतरपुर में आदिवासी महिलाएं कर रहीं 'पंचतत्व आंदोलन', सरकारी परियोजना से परेशान नदी में लगाती दिखीं फंदा, देखें- Video

Ken–Betwa Link Project, Runjh–Majhguwa Dam: आदिवासी महिलाएं नदी के किनारे जमा हुईं और सरकारी परियोजना के खिलाफ नारे लगाए तथा तख्तियां दिखाईं। एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि सरकार बांध के निर्माण के लिए आदिवासी समुदायों को विस्थापित कर रही।

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मप्र: छतरपुर में आदिवासी महिलाएं कर रहीं 'पंचतत्व आंदोलन', सरकारी परियोजना से परेशान नदी में लगाती दिखीं फांसी, देखें- Video

Chhatarpur News: मध्य प्रदेश के छतरपुर में नदी में कुछ महिलाएं फांसी लगाती दिखीं। ये आदिवासी महिलाएं केन-बेतवा लिंक परियोजना और रुंझ-मझगुवां बांध से प्रभावित होने पर प्रदर्शन कर रही हैं। आदिवासी परिवार पिछले 11 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने 'पंचतत्व आंदोलन' किया है। वे इसके माध्यम से सामूहिक रूप से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

आदिवासी महिलाएं नदी के किनारे जमा हुईं और सरकारी परियोजना के खिलाफ नारे लगाए तथा तख्तियां दिखाईं। ANI से बात करते हुए, एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि सरकार बांध के निर्माण के लिए आदिवासी समुदायों को विस्थापित कर रही है।

दुर्गा, काली की तरह, हम भी रौद्र रूप धारण...

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हमारे जंगल, जमीन और घर हमसे छीने जा रहे हैं, इसलिए हमें विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा है। 10 दिन बीत चुके हैं, आज 11वां दिन है, और कोई भी अधिकारी यहां नहीं आया है। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हम यहां से नहीं हटेंगे। अगर वे हमारी अनदेखी करते रहे, तो हो सकता है कि हम उग्रवाद की राह पर चल पड़ें। दुर्गा, काली की तरह, हम भी रौद्र रूप धारण कर सकते हैं।'

क्या है ये योजना?

केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना देश की एक प्रमुख सिंचाई परियोजना है, जिसमें भूमिगत दबाव वाली पाइप सिंचाई प्रणाली अपनाई गई है। इस परियोजना का निर्माण मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में केन नदी पर किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत, पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचा और 2.13 किलोमीटर लंबा दौधन बांध तथा 2 सुरंगें (ऊपरी स्तर 1.9 किमी और निचला स्तर 1.1 किमी) बनाई जाएंगी, और इस बांध में 2,853 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा किया जाएगा। जारी विज्ञप्ति के अनुसार, केन नदी का अतिरिक्त पानी दौधन बांध से निकलने वाली 221 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के माध्यम से बेतवा नदी में भेजा जाएगा, जिससे दोनों राज्यों में सिंचाई और पेयजल की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

इस प्रोजेक्ट के तहत, एक प्रेशराइज्ड माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम के जरिए, 10 जिलों (जिनमें पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी और दतिया शामिल हैं) के 2 हजार गांवों में 8.11 लाख हेक्टेयर इलाके की सिंचाई की जा सकेगी। इसमें यह भी बताया गया है कि इस प्रोजेक्ट से लगभग 7 लाख किसान परिवारों को फायदा होगा।

सरकार के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के 44 लाख लोगों और उत्तर प्रदेश के 21 लाख लोगों को पीने का पानी मुहैया कराएगा। इसके अलावा, यह प्रोजेक्ट 103 MW हाइड्रोपावर और 27 MW सोलर एनर्जी भी पैदा करेगा। इसका पूरा फायदा मध्य प्रदेश को मिलेगा।

इस प्रोजेक्ट में चंदेल काल के ऐतिहासिक तालाबों को बचाने का काम भी शामिल है। मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में चंदेल काल के 42 तालाबों की मरम्मत/नवीनीकरण करके बारिश के मौसम में पानी जमा किया जा सकेगा, जिससे ग्रामीण इलाकों को फायदा होगा और जमीन के नीचे के पानी का स्तर भी बढ़ेगा।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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