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क्या है 'डिजिटल इंडिया बिल'? मोदी 3.0 ने कर ली जिसकी तैयारी, डीपफेक और AI पर लगाने जा रही लगाम!

Digital India Bill: नरेंद्र मोदी सरकार डिटिजल इंडिया बिल लाएगी। बिल को पेश करने से पहले सरकार सभी दलों की आम सहमति बनाने की भी कोशिश करेगी। इस बिल में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से फैलाई जाने वाली अफवाहों, डीपफेक वीडियो, एआई जनरेटेड कंटेंट से निपटने वाले प्रावधान किए जाएंगे।

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Digital India Bill: सरकार गठन के बाद मोदी सरकार 3.0 डीपफेक और AI जनरेटेड कंटेंट पर लगाम लगाने की तैयारी कर रही है। सरकार डिटिजल इंडिया बिल लाएगी। इस बिल में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से फैलाई जाने वाली अफवाहों, डीपफेक वीडियो से निपटने वाले प्रावधान किए जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि संसद के आगामी सत्र में इस बिल को पेश किया जा सकता है और सरकार ने इसका मसौदा भी तैयार कर लिया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस बिल में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी (AI) तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के विकल्प भी तलाशे जाएंगे, इसके साथ ही यूट्यूब के माध्यम से आधा अधूरा सच परोसने वाले कंटेंट को भी कानून के दायरे में लाने की तैयारी है।

बिल को पेश करने से पहले सरकार सभी दलों की आम सहमति बनाने की भी कोशिश करेगी। सूत्रों के मुताबिक, 24 जून से 3 जुलाई तक चलने वाले संसद के विशेष सत्र में 'डिजिटल इंडिया बिल' को पेश किया जा सकता है। बिल में यूट्यूब समेत सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को रेग्यूलेट करने के भी प्रावधान हो सकते हैं। बता दें, पिछली सरकार में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इस तरह के बिल के बारे में पहले ही संकेत दिए थे।

डेटा प्रोटेक्शन बिल को पहले ही मिल चुकी है मंजूरी

बता दें, डीपफेक और एआई जनरेटेड कंटेंट पर लगाम लगाने से पहले सरकार डेटा प्रोटेक्शन बिल को भी पेश कर चुकी है। भारत में आम नागरिकों के डेटा की सुरक्षा को पुख्ता करने वाले इस बिल को कैबिनेट से भी मंजूरी मिल चुकी है। यह बिल उन कंपनियों को कानून के दायरे में लाता है जो बिना यूजर्स की अनुमति के उसके डेटा का इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए करती हैं। सरकार द्वारा लाए गए 'डिटिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल' में काफी कड़े प्रावधान किए गए हैं और उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 500 करोड़ तक का जुर्माना तक लगाया जा सकता है। बता दें, अभी तक कोई कानून नहीं होने के बाद कंपनियां यूजर्स का डेटा का गलत इस्तेमाल करती हैं।

डीपफेक पर मच चुका है बवाल

ज्ञात हो कि डीपफेक वीडियो को लेकर भारत में काफी होहल्ला हो चुका है। बीते साल बॉलीवुड एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना का डीपफेक वायरल हुआ था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी डीपफेक सामने आया था, जिसके बाद पीएम मोदी ने डीपफेक के खतरे को भांपते हुए इसपर लगाम लगाने की वकालत की थी। वह कई मौके पर डीपफेक वीडियो पर चिंता जता चुके हैं। वहीं, इस साल अप्रैल में मुंबई पुलिस ने महाराष्ट्र युवा कांग्रेस के सोशल मीडिया हैंडल और 16 अन्य के खिलाफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का डीपफेक वीडियो शेयर करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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