मोदी कैबिनेट ने बुधवार को महिला आरक्षण बिलों को कैबिनेट ने मंजूदी दे दी है। सूत्रों के अनुसार लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने के बिलों को मंजूरी दी गई है। जानकारी के मुताबिक, 16 अप्रैल से शुरू हो रहे विशेष संसद सत्र इस बिल को पेश किया जाएगा। इनमें संविधान संशोधन बिल भी शामिल होंगे। जानकारी के मुताबिक, इस बिल को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने का प्रावधान है। साल 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन आयोग बनाने का बिल भी लाया जाएगा। इसके तहत सीटें बढ़ाई जाएंगी, जिससे लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी। हालांकि, इस तरह वर्तमान सीटों को नहीं छेड़ा जाएगा।
महिला आरक्षण पर विशेष सत्र
महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा दोनों सदनों में होगी। इसके लिए सरकार विशेष सत्र बुलाने का प्लान कर रही है। जानकारी के मुताबिक, 16, 17 और 18 अप्रैल तक चलने वाले सत्र में महिलाओं के अधिकारों और देश में आधी आबादी के योगदान को लेकर बहस देखने को मिलेगा। इस बिल का मुख्य उद्देश्य देश के निर्वाचन क्षेत्र और पार्लियामेंट में महिलाओं की भागेदारी सुनिश्चित करना है। इससे महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा। इस बिल पर चर्चा से लागू करने पर आने वाली मुश्किलों को दूर करने की कवायत होगी और साथ ही संशोधन बिल को पारित कराना है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण देने के प्रावधान वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 2023 में पारित किया गया था। सरकार अब इसमें संशोधन करके इसे 2029 से लागू करने तथा परिसीमन के माध्यम से लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना बना रही है।
अन्नपूर्णा देवी ने ’एक्स’ पर पोस्ट किया, ’’नारी शक्ति वंदन अधिनियम, महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के स्वर्णिम युग की शुरुआत है। भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भागीदारी केवल आवश्यक ही नहीं, बल्कि परिवर्तनकारी है। महिला आरक्षण से जुड़े नए संवैधानिक संशोधन देश में एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत हैं। उनका कहना है कि यह ऐतिहासिक कदम संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करते हुए नीति-निर्माण को अधिक संवेदनशील, समावेशी और परिणामोन्मुख बनाएगा तथा महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति शासन को नई दृष्टि, संतुलन और जनहित के प्रति अधिक प्रतिबद्धता प्रदान करेगी।
मंत्री के अनुसार, आंकड़े स्वयं इसकी महत्ता दर्शाते हैं क्योंकि वर्तमान में लोकसभा के 543 सदस्यों में केवल 74 महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन और 33 प्रतिशत आरक्षण के बाद यह संख्या बढ़कर 816 में 269 हो जाएगी। राज्य विधानसभाओं में वर्तमान में लगभग 390 महिला विधायक हैं, जो बढ़कर 2,041 हो जाएंगी।
महिला आरक्षण विधेयक पर समाजवादी पार्टी के मुंबई से विधायक अबू आज़मी ने कहा कि हम इस पहल का स्वागत करते हैं, लेकिन हमारी शुरू से ही यह मांग रही है कि महिलाओं के लिए इस कार्यक्रम में दलित महिलाओं और मुस्लिम महिलाओं के लिए एक विशिष्ट कोटा होना चाहिए। अन्यथा, होता यह है कि विशेषाधिकार प्राप्त पृष्ठभूमि की महिलाएं—शिक्षित और धनी—आगे बढ़ जाती हैं, जबकि हाशिए पर रहने वाली महिलाएं, गरीब और संघर्षरत महिलाएं पीछे छूट जाती हैं।
