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'मायावती मेरी नेता रही हैं, उनके खिलाफ कुछ नहीं बोलूंगा', BSP सुप्रीमो पर चुप्पी क्यों साध गए SP के 'स्वामी'

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 30, 2023, 05:07 PM IST

Swami Prasad Maurya: हाल ही में वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में ASI सर्वे कराए जाने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्या ने बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि मस्जिद के नीचे मंदिर था, तो उससे पहले क्या था? इसकी भी जांच की जानी चाहिए।

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स्वामी प्रसाद मौर्या

Photo : BCCL

Swami Prasad Maurya: समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने मायावती को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा है कि मायावती मेरी नेता रही हैं, मैं उनके खिलाफ कुछ नहीं बोलूंगा। बता दें, स्वामी प्रसाद मौर्या का यह बयान तब आया है, जब मायावती ने उन पर निशाना साधा था और चुनाव से पहले समुदायों के बीच दरार पैदा करने का आरोप लगाया था।

दरअसल, हाल ही में वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में ASI सर्वे कराए जाने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्या ने बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि मस्जिद के नीचे मंदिर था, तो उससे पहले क्या था? इसकी भी जांच की जानी चाहिए। सपा नेता ने दावा किया था कि ज्यादातर मंदिर बौद्ध मठों को तोड़कर बनाए गए हैं। इसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्वामी प्रसाद मौर्या पर हमला बोला था।

हर मंदिर में न ढूंढे मस्जिद

स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा, जब हर मंदिर में मस्जिद को ढूंढा जाएगा तो हर मंदिर में लोग बौद्ध मठ भी ढूंढेंगे। उन्होंने, कहा भाजपा साजिश के तहत देश के सांप्रदायिक सौहाद्द को बिगाड़ना चाहती है। वह चाहती है कि देश में शांति कायम न रहे। उन्होंने कहा, हर मस्जिद में मंदिर ढूंढने की परंपरा भाजपा को भारी पड़ेगी, इसलिए 15 अगस्त 1947 के पहले जिस धार्मिक स्थल की जो स्थिति है, उसे वैसा ही रहने देना चाहिए। लोगों से अपील है कि आपसी लड़ाई में न उलझें।

बौद्ध मठों के समर्थन में पेश किए दस्तावेज

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्या ने बद्रीनाथ धाम समेत कई मंदिरों में बौद्ध मठों को तोड़े जाने को लेकर दस्तावेज भी पेश किए। उन्होंने कहा, रामेश्वरम का मंदिर भी बौद्ध मठ को तोड़कर बनाया गया था। उन्होंने कहा, राहुल सांकृत्यायन ने अपनी किताब में लिखा है कि बद्रीनाथ की मूर्ति बुद्ध की है।

अयोध्या के बाद न खड़ा करें कोई नया विवाद

स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा, मेरी कोई मांग नहीं है, मैं बस इतना कहूंगा कि सभी लोग 15 अगस्त 1997 की डेड लाइन का पालन करें और आयोध्या के बाद देश में कोई नया विवाद न खड़ा करें। हमें सभी की आस्था का सम्मान करते हुए भाई चारा स्थापित करना चाहिए। यही हमारा संविधान भी कहता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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