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मथुरा की शाही ईदगाह को बम से उड़ाने की धमकी, कार में बैठे युवक ने खुद पर डाला पेट्रोल

Mathura Shahi Idgah News: पुलिस के मुताबिक, आरोपी युवक की पहचान पुष्पेंद्र चौधरी के रूप में हुई है। उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं लग रही है। युवक ने मस्जिद को बम से उड़ाने की धमकी दी। इसके बाद युवक दौड़कर एक कार में बैठ गया और खुद पर पेट्रोल डाल लिया।

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मथुरा की शाही ईदगाह को बम से उड़ाने की धमकी।

Photo : Times Now Digital

Mathura Shahi Idgah News: मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के पसीने उस समय छूट गए, जब एक युवक ने ईदगाह को बम से उड़ाने की धमकी दी। इसके बाद युवक दौड़कर एक कार में बैठ गया और खुद पर पेट्रोल डाल लिया। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए युवक को दबोच लिया और उसे थाने ले आए। पूछताछ में युवक ने अपना नाम पुष्पेंद्र चौधरी बताया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, मथुरा की शाही ईदगाह को तोड़ना चाहता था। इसलिए उसने कार में बैठकर खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। उसका इरादा खुद पर आग लगाकर कार को ईदगाह तक ले जाने का था। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी की मानसिक स्थिति सही नहीं है। पुलिस ने बताया कि युवक ने पास के पेट्रोल पंप से बोतल में पेट्रोल खरीदा था।

काफी देर तक मची रही सनसनी

एसपी सिटी अरविंद कुमार ने बताया कि घटना करीब एक बजे की बताई जा रही है। शाही ईदगाह के गेट पर सुरक्षा जवान मुस्तैदी के साथ खड़े थे, तभी आरोपी युवक वहां आ पहुंचा। उसने शादी ईदगाह को बम से उड़ाने की धमकी दी, जिसके बाद उसे पकड़ लिया गया। पकड़ा गया युवक थाना जमुनापार क्षेत्र की मीरा विहार कॉलोनी रहने बाला पुस्पेंद्र चौधरी है। उससे पूछताछ की जा रही है। हालांकि अभी तक ये जानकारी सामने आई है कि पकड़े गए युवक के बेटे की मौत हो चुकी है, जिसके बाद से वो मानसिक रूप से अस्वस्थ है और नशे की हालत में भी बताया जा रहा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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