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पैरों से साधा 'गोल्ड' पर निशाना: तीरंदाज शीतल को आनंद महिंद्रा ने किया सलाम, बोले- 'मनचाही कार चुन लो'

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 29, 2023, 01:18 PM IST

Shital Devi: आनंद महिंद्रा ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट 'एक्स' शीतल देवी से जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया है। उन्होंने इस पोस्ट में शीतल देवी को उनकी मनमाफिक कार देने का वादा भी किया है।

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Sheetal Dev-Anand Mahindra

Photo : Twitter

Shital Devi: देश के दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा का एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने यह पोस्ट एशियाई पैरा खेलों में दो गोल्ड हासिल करने वाली तीरंदाज शीत देवी के लिए किया है। शीतल देवी के हाथ नहीं हैं। वह पैरों से ही निशाना साधती हैं। उनकी इस उपलब्धि के बाद आनंद महिंद्रा ने उन्हें खास तोहफा देने का ऐलान किया है। महिंद्र चेयरमैन ने कहा है कि शीतल अपने मनमाफिक कोई भी कार चुन सकती हैं, कम उस कार को उनके हिसाब से कस्टमाइज करेंगे।

आनंद महिंद्रा ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट 'एक्स' शीतल देवी से जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया है। उन्होंने इस वीडियो के कैप्शन में लिखा है कि मैं अब अपने जीवन में कभी भी छोटी-मोटी समस्याओं के बारे में शिकायत नहीं करूंगा। शीतल देवी आप हम सभी के लिए एक शिक्षक के समान हैं। कृपया हमारी रेंज में से आप कोई भी कार अपने लिए चुन लें और हमे उसे आपके उपयोग के लिए हिसाब से कस्टमाइज करेंगे। आनंद महिंद्रा की इस पहल को लोग जमकर सराह रहे हैं।

पैरों से करती हैं तीरंदाजी

बता दें, जम्मू-कश्मीर की रहने वालीं 16 वर्षीय शीतल के हाथ नहीं हैं। वह अपने पैरों से ही तीरंदाजी करती हैं। किश्तवाड़ के दूरस्त इलाके में सैन्य शिविर में पाई गई शीतल को भारतीय सेना ने गोद ले लिया था। उन्होंने एशियाई पैरा खेलों में व्यक्तिगत कंपाउंड वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है। इससे पहले जुलाइ में शीतल ने पैरा विश्व तीरंदाजी में भी सिंगापुर की अलीम नूर एस को हराकर स्वर्ण पदक जीता था।

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प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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