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महाराष्ट्र निकाय चुनाव में परिवारवाद को 'ना', हार गए बड़े नेताओं के करीबी और रिश्तेदार

हारने वाले उम्मीदवार सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के परिवार से और उनके करीबी हैं। इनकी हार से जाहिर है कि मतदाताओं ने एक बार फिर परिवारवाद को नकारा है। बता दें कि महाराष्ट्र के 29 नगर निगम के चुनाव नतीजे 16 जनवरी को आए।

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बीएमसी चुनाव में बड़े नेताओं के परिवार के लोग हारे। तस्वीर-Facebook

Maharashtra Municipal Election Result 2026 : महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में बड़े-बड़े दिग्गज नेताओं के करीबियों एवं रिश्तेदारों की हार हुई है। हारने वाले उम्मीदवार सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के परिवार से और उनके करीबी हैं। इनकी हार से जाहिर है कि मतदाताओं ने एक बार फिर परिवारवाद को नकारा है। बता दें कि महाराष्ट्र के 29 नगर निगम के चुनाव नतीजे 16 जनवरी को आए। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी जीत दर्ज की है। खासकर बीएमसी चुनाव उसने पहली बार जीता है।

नेताओं के परिवार के उम्मीदवार जो चुनाव हार गए

  • दीप्ति वाइकर पोटनिस (सांसद रविंद्र वाइकर की बेटी)
  • वैशाली शेवाले (पूर्व सांसद राहुल शेवाले की भाभी)
  • समाधान सरवणकर (पूर्व विधायक सदा सरवणकर के बेटे)
  • कप्तान मलिक (राकांपा विधायक नवाब मलिक के भाई)
  • गीता गवली (डॉन अरुण गवली की बेटी)
  • तुषार भारतीय (विधायक श्रीकांत भारतीय के भाई)
  • विवेक कलौटी (मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के चाचा)

बीएमसी चुनाव में भाजपा का शानदार प्रदर्शन

बीएमसी चुनाव में भाजपा का अब तक का यह सबसे शानदार प्रदर्शन है। इस कामयाबी के साथ बीएमसी में अपना मेयर बनाने का भाजपा का सपना पूरा हो गया है। अब बीएमसी में पहली बार भाजपा का मेयर होगा। तो वहीं, इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी को लगा है। बीएमसी की कुर्सी उसके हाथ से निकल गई है।

उद्धव ठाकरे को लगा बड़ा झटका

बीएमसी चुनाव में उद्धव ठाकरे की हार की दो प्रमुख वजहें हैं। पहला है एकनाथ शिंदे का शिवसेना से अलग होना और दूसरा है राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस का खराब प्रदर्शन। मुंबई में बीएमसी की सत्ता में काबिज होने के लिए मराठी कोर वोटरों के साथ-साथ गैर-मराठी वोटरों का साथ मिलना जरूरी है। केवल मराठी वोटरों से बीएमसी की सत्ता में नहीं पहुंचा जा सकता। मुंबई में मराठी वोटर करीब 38 प्रतिशत बताए जाते हैं जबकि उत्तर भारतीय, गुजराती एवं अन्य समुदाय के वोटरों की संख्या 30 से 35 प्रतिशत तक जाती है। मुंबई में मुस्लिम वोट की तादाद भी अच्छी खासी है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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