Loksabha Polls 2024: दक्षिण भारत के कर्नाटक में करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सुपर एक्टिव मोड में है। आने वाले इलेक्शंस (पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव 2024) को लेकर वह किसी प्रकार की चूक नहीं करना चाहती है। यही वजह है कि विपक्षी एकता की पुरजोर कोशिशों के बीच वह फूंक-फूंक कर अपने कदम बढ़ा रही है। रविवार (तीन जुलाई, 2023) को इसी कड़ी में भाजपा ने विपक्षी एकता को तगड़ा झटका देते हुए शरद पवार की एनसीपी की असल क्रीम को झपट लिया। हालांकि, महाराष्ट्र में हुए सियासी उलटफेर (शरद पवार के भतीजे अजित पवार की ओर से) महज एक ट्रेलर था, क्योंकि बीजेपी का ध्यान इस संदर्भ में पूरी पिक्चर बनाने से है। यही वजह है कि उसकी कुछ सूबों पर पैनी निगाह है। आइए, जानते हैं क्यों:
दिल्ली से सटे हरियाणा में राज्य इकाई और सहयोगी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के बीच तनावपूर्ण रिश्ते के मद्देनजर भाजपा ने हाल ही में किसी भी संभावना की तैयारी के लिए निर्दलीय विधायकों से समर्थन मांगा था। वैसे, यह उस राज्य में पर्याप्त नहीं हो सकता, जहां बीजेपी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें दो बार की सत्ता विरोधी लहर, कृषि विरोध प्रदर्शन पर गुस्सा और भाजपा सांसद के खिलाफ पहलवानों का हालिया विरोध भी शामिल है। सूत्रों ने इस बाबत एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के नेताओं से जेजेपी के साथ रिश्ते सुधारने को कहा है।
वहीं, पंजाब की बात करें तो वहां भाजपा और पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल करीब आ रहे हैं। हालांकि, मोदी सरकार की ओर से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर जोर देने से मामला बिगड़ सकता है। अकाली दल साफ कर चुका है कि वह इस तरह की चीज को स्वीकार नहीं करेगा। पार्टी प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि यूसीसी का "अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव" पड़ेगा।
उधर, आंध्र प्रदेश में भाजपा ने अपने एक और पूर्व सहयोगी दल तेलुगू देसम पार्टी (टीडीपी) को पैगाम भिजवाया है, जिसके प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने पिछले महीने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात की थी। सूत्रों की मानें तो मीटिंग में इस बात पर चर्चा हुई कि दोनों पार्टियों की स्थिति कैसी है और गठबंधन से उन्हें क्या कुछ फायदा हो सकता है। वैसे, टीडीपी को डर है कि औपचारिक गठबंधन उसकी संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, और "समझदारी और समर्थन" की एक अनौपचारिक व्यवस्था बेहतर काम कर सकती है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स और विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा को केंद्र में एक और "दोस्त" बीजू जनता दल के प्रति अपने दृष्टिकोण का भी पता लगाना होगा, जिसके वाईएसआरसीपी की तरह उच्च सदन में नौ सदस्य हैं। हालांकि, आंध्र के विपरीत भाजपा ओडिशा में मुख्य विपक्षी पार्टी है और इसलिए राज्य स्तर पर बीजद की सीधी प्रतिद्वंद्वी है।
भाजपा के लिए इन सूबों के अलावा एक और बड़ा सिरदर्द है और वह है जलता-सुलगता मणिपुर। नॉर्थ ईस्ट के इस सूबे में जहां उसकी सरकार हिंसा रोकने में सक्षम न साबित हो सकी और वह अशांत पूर्वोत्तर में चिंता पैदा करती दिखी है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम के बीच जनजातीय समुदायों की आशंकाओं को देखते हुए यूसीसी तनाव को और बढ़ा सकता है।
महाराष्ट्र में दो जुलाई को क्या हुआ? जानिए, एक नजर में
दरअसल, सूबे में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत एनसीपी के सीनियर नेता अजित पवार ने रविवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की, जबकि पार्टी के आठ अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। सूत्रों ने बताया कि पटना में हाल में हुई विपक्ष की बैठक में राकांपा अध्यक्ष शरद पवार और पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले की मौजूदगी से अजित पवार और उनके समर्थक खफा थे।देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और (आज की ताजा खबर) के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।
