Modi Cabinet Reshuffle: चुनावी सीजन को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल किया जा सकता है। ऐसी अटकलों के बीच सोमवार (तीन जुलाई, 2023) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता की। देश की राजधानी नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित नवनिर्मित सम्मेलन कक्ष में हुई इस मीटिंग में साल 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी (भाजपा) की रणनीति पर भी चर्चा की गई।
सूत्रों ने इसके साथ ही समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा को बताया कि आगामी चुनावों के मद्देनजर इस बार के मंत्रिपरिषद विस्तार में सरकार और संगठन के बीच तालमेल बिठाने के प्रयास के तहत कुछ केबिनेट मंत्रियों को संगठन में जगह दी सकती है। संगठन के कुछ प्रमुख चेहरों को सरकार में शामिल भी किया जा सकता है।
सूत्रों ने यह भी जानकारी दी कि पीएम ने इस दौरान कहा कि सरकार ने नौ वर्षों में बहुत विकास किया है। मंत्रिपरिषद के सदस्य अगले नौ महीनों में लोगों तक पहुंचें। आगे मीटिंग में साल 2047 तक भारत की संभावित विकास यात्रा पर प्रस्तुति दी गई।
सूत्रों की मानें तो बीजेपी 2024 से जुड़े अपने चुनावी मिशन के लिए पुराने साथियों-सहयोगियों का भी रुख कर सकती है। आइए, एक नजर में जानते हैं कि मोदी किसे और क्यों मौका दे सकते हैं?:
तेलुगू देसम पार्टी से कोई चेहराः कर्नाटक में अपनी करारी हार के बाद बीजेपी बहुत अलर्ट मोड में है। वह किसी भी सूरत में गलती नहीं करना चाहती और यही वजह है कि उसे आंध्र प्रदेश में एन चंद्रबाबू नायडू अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए आवश्यक लग रहे हैं।
शिवसेना (शिंदे गुट) के एक सांसद को मोदी के मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। हालांकि, यह कौन होगा? यह तो फिलहाल साफ नहीं है, पर उद्धव ठाकरे को बागी तेवर दिखाने वाले एकनाथ शिंदे को इस तरह बीजेपी प्राइज दे सकती है।
राष्ट्रीय लोक जनता दल के उपेंद्र कुशावाहाः बीजेपी कुशवाहा के जरिए बिहार के कोइरी और कुशवाहा वोट को साधने का प्रयास कर सकती है और उपेंद्र का दल भी एनडीए का हिस्सा रह चुका है।
लोक जन शक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवानः पासवान के पुत्र खुद को पीएम मोदी का हनुमान करार दे चुके हैं और वह लंबे समय से बिहार में बीजेपी के साथ रहे हैं। चिराग के साथ छह फीसदी दलित वोट बैंक माना जाता है।
शिरोमणि अकाली दल से हरसिमरत कौर बादलः यह भाजपा का सबसे पुराना घटक दल रहा है और पंजाब में इसका बड़ा वोट बैंक माना जाता है। अगर ये दोनों दल मिलकर लड़ें तो वोट पर्सेंटेज 37 तक पहुंच सकता है, जिससे AAP को नुकसान होगा।
वैसे, इस साल केंद्रीय मंत्रिपरिषद की यह दूसरी मीटिंग है। पीएम मोदी ने ऐसी ही एक बैठक जनवरी में आम बजट पेश होने से पहले की थी। उन्होंने 2021 में आखिरी बार अपनी मंत्रिपरिषद में फेरबदल और विस्तार किया था, जिसके बाद उन्होंने कुछ एक मौकों पर कुछ मंत्रियों के विभागों में परिवर्तन किया।
2021 के मंत्रिपरिषद फेरबदल और विस्तार में मोदी ने 36 नए चेहरों को जगह दी थी, जबकि 12 तत्कालीन मंत्रियों की पद से छुट्टी कर दी थी। जिन मंत्रियों की छुट्टी की गई थी उनमें डी वी सदानंद गौड़ा, रविशंकर प्रसाद, रमेश पोखरियाल निशंक, प्रकाश जावड़ेकर, संतोष गंगवार, बाबुल सुप्रियो, हर्षवर्धन प्रमुख थे। वहीं, इस विस्तार में अश्विनी वैष्णव, ज्योतिरादित्य सिंधिया और भूपेंद्र यादव जैसे नेताओं को शामिल किया था और अनुराग ठाकुर, किरेन रीजीजू और मनसुख मांडविया को पदोन्नत किए गए थे।
