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Rajasthan: कृपाल सिंह जघीना हत्याकांड के आरोपियों को मारी गई गोली, पेशी पर ले जाते वक्त हुई वारदात

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 12, 2023, 04:04 PM IST

Rajasthan Crime News: कृपाल सिंह जघीना हत्याकांड के आरोपियों को गोली मार दी गई। दिल दहला देने वाली इस वारदात में आरोपी गैंगस्टर कुलदीप जघीना की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दूसरा आरोपी विजयपाल गंभीर रूप से घायल हो गया।

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गैंगस्टर कुलदीप जघीना की हत्या

Photo : BCCL

Rajasthan Crime News: राजस्थान के भरतपुर में कृपाल सिंह जघीना हत्याकांड के आरोपियों को गोली मार दी गई। दिल दहला देने वाली इस वारदात में आरोपी गैंगस्टर कुलदीप जघीना की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं विजयपाल गंभीर रूप से घायल हो गया। खास बात यह है कि यह वारदात उस वक्त हुआ, जब पुलिस के जवाब दोनों आरोपियों को जयपुर से भरतपुर कोर्ट ले जा रही थी।

जानकारी के मुताबिक, अमोली टोल प्लाजा के पास बदमाशों ने पुलिस टीम पर मिर्ची बम से हमला कर दिया। जब तक कुछ समझ आता, बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। कई गोलियां गैंगस्टर कुलदीप सिंह जघीना को लगीं, जिससे उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस उसके शव को अस्पताल लेकर पहुंची। बताया जा रहा है कि इस घटना में एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ है।

4 सितंबर 2022 को हुई थी कृपाल जघीना की हत्या

बता दें, कृपाल सिंह जघीना की बीते साल 4 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी। जमीन विवाद में हुए इस हत्याकांड में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। कृपाल जघीना रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य भी थे।

जल्द होगी आरोपियों की पहचान

पुलिस अधीक्षक भरतपुर मृदुल कच्छवाहा के मुताबिक, पुलिस ने टोल प्लाजा से पर लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों पहचान कर ली है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया, फायरिंग में काम में लाई गई गाड़ी को भी पुलिस ने बरामद कर लिया है। आरोपियों का लोकेशन के हिसाब से पीछा कर किया जा रहा है। वहं फॉरेंसिक टीम मौके पर निरीक्षण कर रही है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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