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कर्नाटक की राजनीति के पांच योद्धा जो कभी भी बदल सकते हैं चुनावी स्थिति, मोदी और शाह भी इन्हें नहीं करते नजरअंदाज

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 3, 2023, 09:38 AM IST

Karnataka Assembly Election: दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा, सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार, एचडी कुमारस्वामी और बसवराज बोम्मई... कर्नाटक की राजनीति के ये वे पांच नाम हैं, जिनके बिना राज्य के चुनाव अधूरे हैं। इन पांच नेताओं को नजरअंदाज करना किसी भी पार्टी के लिए मुश्किल है। ऐसे में ये नेता इस चुनाव में भी बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं।

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023

Photo : Times Now Digital

Karnataka Election: कर्नाटक में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव आयोग के कार्यक्रम में मुताबिक 10 मई को मतदान होगा और 13 मई को नतीजे जारी होंगे। भाजपा और कांग्रेस के लिए इस चुनाव को 2024 लोकसभा का मिनी सेमीफाइनल माना जा रहा है। दरअसल, यह राज्य चुनाव की दृष्टि से दोनों ही पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा जहां सत्ता में वापसी के लिए संघर्ष करेगी तो वहीं कांग्रेस यहां सत्ता पाने की कोशिश।

ऐसे में हम यहां कर्नाटक की राजनीति के उन पांच सियासी योद्धाओं की बात करेंगे, जो इस राज्य के चुनावी नतीजों को कभी भी बदलने का दमखम रखते हैं। इनका सियासी कद इतना बड़ा है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी इनको नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। इनमें दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा, सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार, एचडी कुमारस्वामी और बसवराज बोम्मई का नाम शामिल है।

सबसे पहले बात येदियुरप्पा की

कर्नाटक की राजनीतक चर्चा भाजपा के दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा के नाम के बिना अधूरी है। इस राज्य की राजनीति इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है। कर्नाटक की राजनीति में विशेष दखल रखने वाले लिंगायत समुदाय में येदियुरप्पा की पकड़ सबसे मजबूत मानी जाती है, इसलिए चुनाव में इनकों नजरअंदाज करना काफी मुश्किल है। भले ही येदियुरप्पा सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा कर चुके हों, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह उनकी अहमियत को बखूबी जानते हैं। तभी उनके मंचो पर येदियुरप्पा को ही भाजपा को चेहरा बनाया जा रहा है।

अब सिद्धारमैया के बारे में जानिए

कर्नाटक के दिग्गज राजनेताओं में सिद्धारमैया का नाम भी शुमार होता है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और इस कांग्रेस नेता को नजरअंदाज करना भी मुश्किल है। वह हमेशा से विपक्षी पार्टियों के लिए एक कड़ी चुनौती माने जाते रहे हैं। दरअसल, सिद्धारमैया के पास लंबा राजनीतिक अनुभव है और वह एक जमीनी नेता के तौर पर जाने जाते हैं। कर्नाटक के तीसरे सबसे बड़े जातीय समुदाय कुरूबा से आने वाले सिद्धारमैया के सामने भाजपा को खूब पसीना बहाना पड़ सकता है।

अब किंग मेकर एचडी कुमारस्वामी की बात

कर्नाटक में चुनावी मुकाबला हो और एचडी कुमारस्वामी की बात न हो, ऐसा होना लाजमी नहीं है। वह हमेशा से किंग मेकर की भूमिका निभाते रहे हैं, फिर चाहें बात भाजपा की हो या फिर कांग्रेस की। इसलिए राज्य में जब भी चुनाव होते हैं, सभी की निगाहें जनता दल (सेक्यूलर) के नेता कुमारस्वामी पर टिक जाती हैं। उनकी पार्टी बहुमत हासिल करे या न करे, लेकिन इतनी सीटें जीतने में जरूर कामयाब हो जाते हैं कि उनके सहयोग के बिना कोई भी पार्टी सत्ता तक का रास्ता तय करने में असमर्थ नजर आती है। राज्य की 224 सीटों पर हुए पिछले चुनाव में भी जेडीएस को 37 सीटें मिली थीं।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई भी नहीं किसी से कम

कर्नाटक के मौजूदा मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई भी किसी से कम नजर नहीं आते। दरअसल, उनकी गिनती मजबूत लिंगायत नेता और दिग्गज येदियुरप्पा के करीबियों में होती है। येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद भाजपा ने बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया था। इसके बाद से उन्होंने कभी भी शीर्ष नेतृत्व को निराश नहीं किया और हर मुद्दे पर पार्टी को डिफेंड करने में कामयाब हुए। वह केंद्रीय नीतियों को भी राज्य में मजबूत तरीके से पालन करवाने में भी कामयाब रहे।

डीके शिवकुमार का बढ़ता कद

कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार भी विपक्ष के लिए मजबूत चुनौती माने जाते हैं। दरअसल, उनकी छवि सड़क पर संघर्ष करने वाले नेताओं की है। इसलिए वह अक्सर भाजपा के निशाने पर भी रहते हैं। दूसरी तरफ डीके शिवकुमार का कद कांग्रेस में भी काफी बढ़ा है। उनकी भूमिका एक संकटमोचक नेता की तरह है, जो पार्टी के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, फिर बात चाहें केंद्रीय राजनीति की हो या फिर राज्य की, शिवकुमार ने हर बार खुद को साबित किया है। इसलिए इन्हें भी नजरअंदाज करना काफी मुश्किल होगा।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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