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Kalita Majhi: दूसरे के घरों में काम करने से लेकर बंगाल की मंत्री बनने तक, कलिता माझी ने बंगाल में रच डाला इतिहास

Kalita Majhi: बीजेपी विधायक कलिता माझी, बंगाल कैबिनेट में शामिल हो चुकी हैं। कभी घरेलू सहायिका थीं, फिर विधायक बनीं और अब पश्चिम बंगाल (West Bengal) सरकार में मंत्री।

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कलिता माझी बनी बंगाल सरकार में मंत्री

कुछ कहानियां कागज पर नहीं, बल्कि हौसलों की स्याही से सीधे वक्त की छाती पर लिखी जाती हैं। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में इस बार एक ऐसी ही ऐतिहासिक और जज्बे से भरी कहानी सामने आई है, जिसने देश के लोकतांत्रिक ढांचे की असली ताकत को दुनिया के सामने रख दिया है। यह कहानी है कलिता माझी (Kalita Majhi) की, जो कल तक दूसरों के घरों में चूल्हा-चौका संभालती थीं, लेकिन आज पश्चिम बंगाल सरकार में राज्य मंत्री के रूप में शपथ ले चुकी है।

तंग गलियों से सत्ता के गलियारों तक

पश्चिम बंगाल के पात्रा पारा इलाके में पिछले दो दशकों (20 साल) से भी ज्यादा समय से कलिता माझी की पहचान एक बेहद साधारण, मेहनती और विनम्र घरेलू कामगार (डोमेस्टिक हेल्प) के रूप में थी। सुबह की पहली किरण के साथ दूसरों के घरों में जाकर बर्तन मांजना, झाड़ू-पोछा करना और परिवार का पेट पालना ही उनकी जिंदगी का ढर्रा था।

कलिता ने कभी बड़े-बड़े ख्वाब देखना तो दूर, शायद यह भी नहीं सोचा होगा कि जिन हाथों में कल तक झाड़ू और बर्तन हुआ करते थे, एक दिन उन्हीं हाथों में राज्य की बागडोर संभालने की कलम होगी। लेकिन उनके इलाके के लोगों के साथ उनका जुड़ाव बेहद गहरा और आत्मीय था, जिसने आगे चलकर उनकी किस्मत की नई पटकथा लिखी।

जब लोकतंत्र ने बदली कलिता की तकदीर

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जब कलिता माझी की जमीनी पकड़ और उनके सीधे स्वभाव को देखा, तो उन्हें 'ऑसग्राम' (Ausgram) आरक्षित विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।कलिता माझी ने सादगी से चुनाव लड़ा, जनता ने बेइंतहा प्यार दिया। जब चुनाव के नतीजे आए, तो वे सिर्फ चौंकाने वाले नहीं, बल्कि इतिहास रचने वाले थे। कलिता माझी को ऑसग्राम की जनता ने पलकों पर बिठाते हुए 1,07,692 वोट सौंप दिए।उन्होंने सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अपने सबसे करीबी और कद्दावर प्रतिद्वंद्वी श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी। यह महज एक राजनीतिक जीत नहीं थी, बल्कि उस भरोसे की जीत थी जो एक आम जनता अपने बीच के ही किसी सीधे-सच्चे इंसान पर जताती है।

शपथ ग्रहण के साथ शुरू हुआ नया सफर

विधायक बनने के बाद कलिता माझी का सफर यहीं नहीं थमा। आज हुए पश्चिम बंगाल के कैबिनेट विस्तार में उन्हें 'राज्य मंत्री' (Minister of State) के रूप में शामिल कर एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। कल तक जो समाज उन्हें एक अदने से कामगार के रूप में देखता था, आज वह उन्हें "माननीय मंत्री जी" कहकर संबोधित कर रहा है। लेकिन कलिता के पैर आज भी जमीन पर हैं। वे आज भी अपने पात्रा पारा और ऑसग्राम के उन परिवारों के साथ उतनी ही विनम्रता से जुड़ी हैं, जिनके सुख-दुख में वे कभी शामिल हुआ करती थीं।

भारत की लोकतांत्रिक ताकत का प्रतीक

कलिता माझी की यह सफलता भारत के लोकतंत्र की उस खूबसूरत ताकत का प्रतीक है, जहां एक चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री बन सकता है और दूसरों के घरों में काम करने वाली एक साधारण महिला अपनी लगन के दम पर राज्य की मंत्री बन सकती है। कलिता की यह कहानी आने वाली कई पीढ़ियों को यह हौसला देगी कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर आपके इरादे नेक हैं, तो आसमान में भी सुराख किया जा सकता है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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