देश

कौन हैं काजल हिंदुस्तानी? खुद को बताती हैं प्राउड हिंदुस्तानी, अब गुजरात पुलिस के सामने करना पड़ा सरेंडर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 10, 2023, 10:27 AM IST

Who is Kajal Hindustani: काजल हिंदुस्तानी खुद को 'गर्वित हिंदुस्तानी' बताती हैं। मूल रूप से वह राजस्थान की रहने वाली हैं। वह विश्व हिंदू परिषद से भी जुड़ी हुई हैं, रामनवमी के दिन गुजरात में उन पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है।

Image

काजल हिंदुस्तानी (क्रेडिट- @kajal_jaihind)

Photo : Twitter

Kajal Hindustani Arrested: काजल हिंदुस्तानी इन दिनों चर्चा में हैं। वजह है रामनवमी के दिन उनका एक बयान। मुस्लिम महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद काजल हिंदुस्तानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। वह लगातार एक सप्ताह से गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहीं थीं। हालांकि, अब उन्होंने गुजरात पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।

काजल हिंदुस्तानी पर आरोप है कि उन्होंने गिर सोमनाथ जिले में रामनवमी के दिन नफरत फैलाने वाला भाषण दिया। उनके भाषण के बाद उना शहर में सांप्रदायिक हिंसा भड़की और पथराव भी हुआ।

अब जानते हैं कौन हैं काजल हिंदुस्तानी

काजल हिंदुस्तानी मूल रूप से राजस्थान के ब्राह्मण परिवार से ताल्लुख रखती हैं। उनका असली नाम काजल त्रिवेदी है। हालांकि, गुजरात के सिंगला परिवार में शादी होने के बाद उन्होंने अपना सरनेम बदलकर सिंगला कर लिया और वह काजल सिंगला कहलाने लगीं।

कैसे बनीं काजल हिंदुस्तानी

काजल गुजरात में हिंदुत्व की 'पोस्टर गर्ल' कही जाती हैं। वह अपने ट्विटर प्रोफाइल पर खुद को एक उद्यमी, रिसर्च एनालिस्ट, सोशल एक्टिविस्ट, नेशनलिस्ट और गर्वित हिंदुस्तानी बताती हैं। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर उन्हें 93 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। वह दावा करती हैं कि कुछ दलित नेताओं ने ब्राह्मणवाद के नाम पर उन्हें टारगेट करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्होंने अपना सरनेम सिंघला से हटाकर हिंदुस्तानी कर लिया।

विश्व हिंदु परिषद से हैं जुड़ी

काजल हिंदुस्तानी विश्व हिंदू परिषद से भी जुड़ी हुई हैं। वह नियमित तौर पर विहिप के कार्यक्रमों में भाग लेती आई हैं और कथित तौर पर हिंदू राष्ट्र की समर्थक हैं। वह अपने बयानों को लेकर भी चर्चा में रहती हैं। बीते दिनों उनके बयान के बाद उना में दो दिनों तक सांप्रदायिक तनाव बना रहा, एक अप्रैल की रात पथराव भी हुआ। पुलिस ने इस मामले में 80 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया था।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article