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सिंधिया ने जीता दिल: चुनाव प्रचार के दौरान बुजुर्ग महिला को लगाया गले; देखें Video

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 6, 2023, 10:11 AM IST

Jyotiraditya Scindia: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर में एक चुनाव प्रचार में दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला उनकी ओर आती है और उन्हें आशीर्वाद देकर गले लगा देती है। इसके बाद सिंधिया भी महिला से मिलते हैं।

Jyotiraditya Scindia: पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। कल छत्तीसगढ़ और मिजोरम में मतदान भी होना है। वहीं मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना की सत्ता हासिल करने के लिए सभी पार्टियां एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। इस बीच भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। यह वीडियो ग्वालियार कहा है, जिसमें सिंधिया एक बुजुर्ग महिला से आत्मीयता से मिलते हुए दिखाई दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर में एक चुनाव प्रचार में दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला उनकी ओर आती है और उन्हें आशीर्वाद देकर गले लगा देती है। इसके बाद सिंधिया भी महिला से मिलते हैं। उन्हें लाठी पकड़ाकर कुर्सी पर बिठाते हैं और महिला के पास से इकट्ठी भीड़ को दूर करते हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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