Jharkhand Rajya Sabha Election 2026: झारखंड में राज्यसभा चुनाव अचानक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। जिस महागठबंधन ने मिलकर सरकार बनाई, अब उसी गठबंधन के भीतर राजनीतिक दबाव और शक्ति प्रदर्शन खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सहमति के बिना उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
गुरुवार देर शाम कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सलाहकार प्रणव झा को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके तुरंत बाद शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने झामुमो विधायकों की आपात बैठक बुलाई। बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए तय किया गया कि झामुमो राज्यसभा की दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा। सूत्र यह फैसला महागठबंधन के भीतर कांग्रेस के लिए स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है कि झारखंड में अंतिम निर्णय का केंद्र अभी भी झामुमो ही है।
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कांग्रेस की राह मुश्किल
राज्यसभा चुनाव (Jharkhand Rajya Sabha chunav 2026) में जीत के लिए प्रथम वरीयता के 28 वोट जरूरी हैं। कांग्रेस के पास अपने 16 विधायक हैं। यानी उसे जीत के लिए कम से कम 12 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।
महागठबंधन की कुल ताकत
- JMM – 34 विधायक
- कांग्रेस – 16 विधायक
- RJD – 4 विधायक
- CPI(ML) – 2 विधायक
- कुल – 56 विधायक
राजद सरकार का हिस्सा है और उसके कोटे से मंत्री भी सरकार में शामिल हैं। ऐसे में राजद का कांग्रेस के पक्ष में खुलकर जाना आसान नहीं दिख रहा। CPI(ML) का रुख भी गठबंधन की सामूहिक रणनीति पर निर्भर करेगा।
भाजपा के लिए खुला मौका
दूसरी ओर विपक्ष के पास कुल 24 विधायक हैं:
- भाजपा – 21
- जदयू – 1
- आजसू – 1
- लोजपा – 1
- कुल – 24 विधायक
ऐसे में भाजपा को जीत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए केवल 4 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। अब अगर महागठबंधन के भीतर वोटों का बंटवारा हुआ या फिर क्रॉस वोटिंग हुई तो भाजपा के लिए दूसरी सीट का रास्ता आसानी से खुल सकता है।
दूसरी वरीयता के वोट बन सकते हैं गेमचेंजर
वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए संभावना बन रही है कि राज्यसभा चुनाव में एक बार फिर द्वितीय वरीयता (Second Preference Vote) निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यदि कांग्रेस, झामुमो और भाजपा तीनों मैदान में उतरते हैं तो मुकाबला सीधा नहीं रहेगा और वोटों की गणित अंतिम दौर तक रोमांच बनाए रख सकती है। आपको बता दें कि हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा विजय की पार्टी TVK को अपना समर्थन देने पर DMK ने कांग्रेस नेतृत्व वाली INDIA गठबंधन से किनारा कर लिया था।
