मुंबई की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को विमानन कंपनी ’जेट एयरवेज’ के संस्थापक नरेश गोयल को चार हफ्ते के लिए लंदन जाने की अनुमति दे दी, ताकि वह अपनी चिकित्सा स्थिति पर विशेषज्ञों से परामर्श कर सकें।धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत दायर मामलों की सुनवाई करने वाले विशेष न्यायाधीश आरबी रोटे ने गोयल की अर्जी स्वीकार करते हुए कहा कि विभिन्न बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति के लिए विशेषज्ञों की राय लेने और अपनी चिकित्सा स्थिति का पुनर्मूल्यांकन कराने के लिए विदेश यात्रा करना एक बुनियादी मानवाधिकार है।
न्यायमूर्ति रोटे ने कहा, 'यह भारत के संविधान के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकार का एक पहलू है।'गोयल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने दलील दी कि उनके मुवक्किल 'मैलिग्नेंट डुओडेनम न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' और हृदय रोग सहित कई अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा, 'अपनी पत्नी की मौत के कारण गोयल गंभीर अवसाद से भी जूझ रहे हैं और उनके मन में आत्महत्या तक के विचार आते हैं।'
पोंडा ने कहा कि भारत में गोयल की चिकित्सा टीम ने गैर-सर्जिकल उपचारों का पता लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय परामर्श लेने की सिफारिश की, क्योंकि उनकी उम्र और कई अन्य बीमारियों के कारण ’व्हिपल प्रक्रिया’ जैसी 'बेहद जटिल' सर्जरी अत्यधिक जोखिम भरी होगी।प्रवर्तन निदेशालय ने गोयल की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि 77 वर्षीय याचिकाकर्ता केनरा बैंक से 5,716 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के गबन का 'मुख्य सूत्रधार' है।
उनका बेटा निवान गोयल लंदन में मौजूद है
विशेष लोक अभियोजक सुनील गोंसाल्वेज ने गोयल के विदेश भागने के खतरे का हवाला देते हुए कहा कि उनके पास उच्च मूल्य की विदेशी संपत्ति है और उनका बेटा निवान गोयल लंदन में मौजूद है। हालांकि, न्यायमूर्ति रोटे ने कहा कि बंबई उच्च न्यायालय ने गोयल को कानूनी तौर पर 'बीमार और कमजोर' घोषित किया है। गोयल को लंदन के वेलिंगटन अस्पताल में 27 मई 2026 को एक डॉक्टर के साथ मुलाकात का समय मिलने की पुष्टि होने का जिक्र करते हुए अदालत ने माना कि यात्रा आवश्यक है।
ईडी ने गोयल को सितंबर 2023 में गिरफ्तार किया था। उसका आरोप है कि गोयल ने कैनरा बैंक द्वारा जेट एयरवेज को दिए गए 538.62 करोड़ रुपये के ऋण का गबन करके धन शोधन किया था। फिलहाल वह चिकित्सा कारणों से जमानत पर जेल से बाहर हैं।
