राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म होने के बाद अधिकांश विपक्षी दलों ने तुरंत केंद्र सरकार के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी। लेकिन बिहार में महागठबंधन में शामिल जदयू ने एक दिन बाद प्रतिक्रिया दी। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन(ललन) सिंह ने शनिवार (25 मार्च) प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राहुल गांधी के संबंध में 24 घंटे के अंदर जिस प्रकार से फैसला लिया गया है वह दर्शाता है कि केंद्र सरकार हताशा में है। लोकतंत्र की प्रक्रिया होती है, कार्ट का फैसला चुनाव आयोग में जाता है। चुनाव आयोग के माध्यम से वे स्पीकर के पास जाता है। ये सारी प्रक्रिया 10 घंटे में करना दिखाता है कि इसमें केंद्र सरकार की भूमिका है। इसमें केंद्र सरकार ने जो भूमिका निभाई है वह बौखलाहट में है। वो हताश हो चुके हैं। उनसे जनता को जो विश्वास हट रहा है। उसके कारण हताश हैं। इस देश की जनता बहुत सजग है। सब देख रही है 2024 में उनके एक-एक काम का हिसाब लेगी। लेकिन जदयू के कद्दवार नेता और सीएम नीतीश कुमार ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
नीतीश कुमार के महागठबंधन में शामिल से तेजस्वी पर कार्रवाई
साथ ही उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव के बारे में भी वही हो रहा है। 2008 में शिकायत सीबीआई की जांच हुई लेकिन तब कह सकते हैं कि तब यूपीए की सरकार थी। 2014 के बाद से एनडीए की सरकार है अगर उसमें कुछ सक्ष्य था तब कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे थे। जब 2022 में महागठबंधन में नीतीश कुमार जी फिर से शामिल हो गए तब आपको दिव्य ज्ञान हो गया साक्ष्य का। तब कार्रवाई करने लगे।
सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स का हो रहा है राजनीतिक इस्तेमाल
ललन सिंह ने आगे कहा कि इसे ये जाहिर से केंद्र की सरकार सीबीआई का ईडी का, इनकम टैक्स का इस्तेमाल राजनीतिक कारणों से कर रही है। अपने राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए कर रही है। उन पर दबाव बनाने के लिए कर रही है। देश की जनता देख रही है। समय पर हिसाब चुकता हो जाएगा।
ये है पूरा मामला
गौर हो कि सूरत की एक अदालत द्वारा मानहानि के मामले में सजा सुनाए जाने पर केरल की वायनाड संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे राहुल गांधी को शुक्रवार को लोकसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि उनकी अयोग्यता संबंधी आदेश 23 मार्च से प्रभावी होगा। सूरत की एक अदालत ने मोदी सरनेम संबंधी टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ 2019 में दर्ज आपराधिक मानहानि के एक मामले में उन्हें गुरुवार को दो साल जेल की सजा सुनाई थी। अदालत ने हालांकि राहुल को जमानत भी दे दी और उनकी सजा के अमल पर 30 दिनों तक के लिए रोक लगा दी, ताकि वह फैसले को चुनौती दे सकें।
