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Jammu Kashmir: सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता, गंडोह में तीन आतंकी ढेर, टेरर मॉड्यूल का भी भंडाफोड़

Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आतंकी मॉड्यूल के सरगनना की पहचान मोहम्मद लतीफ उर्फ हाजी लतीफ के रूप में की गई है। इसके अलावा मॉड्यूल के 8 सदस्यों को हिरासत में भी लिया गया है। मॉड्यूल के सदस्यों ने विदेशी आतंकवादियों की घुसपैठ में भी मदद की थी।

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Jammu and Kashmir

Photo : ANI

Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने बताया कि उसने गंडोह में तीन विदेशी आतंकवादियों को मार गिराया है। इसके अलावा पुलिस ने एक आतंकी मॉड्यूल का भी भंडाफोड़ करते हुए बड़े स्तर पर गिरफ्तारी की है। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय एजेंसियों की ओर से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर डोडा, उधमपुर और कठुआ के ऊपरी इलाकों में हाल ही में घुसपैठ और बढ़ी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार एक आतंकवादी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि आतंकी मॉड्यूल के सरगनना की पहचान मोहम्मद लतीफ उर्फ हाजी लतीफ के रूप में की गई है। इसके अलावा मॉड्यूल के 8 सदस्यों को हिरासत में भी लिया गया है, इनकी पहचान अख्तर अली, सद्दाम, कुशाल, नूरानी, मकबूल, लियाकत, कासिम दीन, खादिम के रूप में की गई है। पुलिस ने बताया कि मॉड्यूल के सदस्यों ने विदेश आतंकवादियों की घुसपैठ में मदद की थी। पुलिस ने बताया कि मोहम्मद लतीफ उर्फ हाजी लतीफ पुत्र स्वर्गीय मीर जिला कठुआ के अम्बे नाल का निवासी है। वह इलाके में ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) के नेटवर्क का मास्टरमाइंड है। वह इलाके से गुजरने वाले आतंकवादियों के समूहों के लिए गाइड/लॉजिस्टिक्स आदि के रूप में काम करता था।

सीमा पार हैंडलर से था संपर्क

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि मॉड्यूल के सदस्य सीमा पार आतंकी हैंडलर के संपर्क में थे और इसके सदस्यों ने सांबा-कठुआ सेक्टर में विदेशी आतंकवादियों के भारत में अवैध और गुप्त प्रवेश में भूमिका निभाई थी। इस मॉड्यूल के सदस्य आतंकवादियों को उधमपुर-कठुआ-डोडा जिलों के पहाड़ों और जंगलों की ऊपरी पहुंच में कैलाश पर्वत के आसपास मार्गदर्शन करने के लिए भी जिम्मेदार थे। इस दौरान आतंकियों को शेल्टर, भोजन और अन्य रसद का सामान भी इन्हीं मॉड्यूल के सदस्यों द्वारा पहुंचाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि मॉड्यूल के सदस्यों ने पुष्टि की है कि गंडोह मुठभेड़ में मारे गए तीन आतंकवादियों ने छिपने और ऊपरी इलाकों तक पहुंचने तक बिना पकड़े गए यात्रा करने में मॉड्यूल की मदद ली थी।

50 से अधिक लोगों से की गई पूछताछ

जोनल पुलिस मीडिया सेंटर जम्मू ने आगे जानकारी दी कि पशुओं को चराने के लिए ऊपरी इलाकों और पहाड़ों पर कच्ची झोपड़ियों में रहने वाले 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई है। इनमें से ज्यादातर ने विदेशी आतंकवादियों के संपर्क में आने की बात स्वीकार की है। आतंकवादियों को भोजन, आश्रय या संचार सहायता प्रदान करने की बात स्वीकारी है। कुछ लोगों ने पुलिस को सूचित नहीं किया और कुछ ने आतंकवादियों से पैसे भी लिए हैं।जिन लोगों ने समय पर पुलिस को सूचित किया है, उन्हें निर्दोष माना जा रहा है। वहीं अन्य की जांच की जा रही है। मीडिया सेंटर ने आम जनता से अनुरोध किया है कि वे आतंकवादियों के बारे में कोई भी जानकारी मिलने पर जल्द पुलिस को सूचित करें।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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