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ISRO टीम CMS-03 लॉन्च से पहले पहुंची तिरुमाला मंदिर, आज किया जाएगा सबसे भारी उपग्रह को लॉन्च, जानें- इसके बारे में सबकुछ

GSAT-7R खास तौर पर इंडियन नेवी के लिए बनाया गया है और यह 2013 में लॉन्च हुए GSAT-7 रुक्मिणी सैटेलाइट की जगह लेगा। यह लॉन्च 5:26 PM IST पर होगा। यह लॉन्च बहुत जरूरी है। सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट में हाल की रुकावटों के बाद इसपर बहुत ज्यादा दांव लगा है। यह इसरो के स्वदेशी टेक्नोलॉजी के जरिए देश के डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के कमिटमेंट को दिखाएगा।

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ISRO आज करेगा सबसे भारी उपग्रह को लॉन्च (X/ISRO)

ISRO LVM3 Rocket Set to Launch CMS-03: इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) रविवार (2 नवंबर) को देश का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट CMS-03 लॉन्च करने वाला है। यह लॉन्च आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर से होगा। LVMS-M5/CMS-03 मिशन के लॉन्च से पहले, इसरो के चेयरमैन नारायणन की लीडरशिप में साइंटिस्ट की एक टीम ने भगवान श्री वेंकटेश्वर से सैटेलाइट के सफल लॉन्च के लिए आशीर्वाद मांगा।

मंदिर के अधिकारियों ने टीम का स्वागत किया और दर्शन का इंतजाम किया। बाद में टीम ने सैटेलाइट का एक मॉडल भगवान के चरणों में रखकर सफलता की प्रार्थना की।

CMS-03 के बारे में

IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, CMS-03 एक मल्टी-बैंड मिलिट्री कम्युनिकेशन सैटेलाइट है, जिसे GSAT-7R के नाम से भी जाना जाता है। इसे लॉन्च व्हीकल मार्क 3 (LVM3) से लॉन्च किया जाएगा।

'भारत का सबसे पावरफुल रॉकेट...'

LVM3 भारत का सबसे पावरफुल रॉकेट है और देश का सबसे भारी लॉन्च व्हीकल है और स्पेस में 4,000 kg तक वजन ले जा सकता है। इसने चांद पर चंद्रयान-3 जैसे मिशन को सक्सेसफुली लॉन्च किया है, जिससे भारत चांद के साउथ पोल के पास सक्सेसफुली लैंड करने वाला पहला देश बन गया। डेजिग्नेटेड LVM3-M5 इसकी पांचवीं ऑपरेशनल फ्लाइट होगी।

ISRO का CMS-03

ISRO के एक बयान में कहा गया, 'CMS-03 एक मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सैटेलाइट है जो भारतीय जमीन समेत एक बड़े समुद्री इलाके में सर्विस देगा।'

बयान के मुताबिक, CMS-03 का वजन लगभग 4,400kg है और यह भारतीय जमीन से जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में लॉन्च होने वाला सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट होगा।

ISRO ने कहा, 'लॉन्च व्हीकल को पूरी तरह से असेंबल और स्पेसक्राफ्ट के साथ इंटीग्रेट कर दिया गया है और आगे के प्री-लॉन्च ऑपरेशन के लिए 26 अक्टूबर को लॉन्च पैड पर ले जाया गया है।'

CMS-03 पेलोड में C, एक्सटेंडेड C, और Ku बैंड पर वॉइस, डेटा और वीडियो लिंक के लिए ट्रांसपोंडर शामिल हैं।

कब किया जाएगा लॉन्च?

यह लॉन्च 5:26 PM IST पर होगा। यह लॉन्च बहुत जरूरी है। सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट में हाल की रुकावटों के बाद इसपर बहुत ज्यादा दांव लगा है। यह इसरो के स्वदेशी टेक्नोलॉजी के जरिए देश के डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के कमिटमेंट को दिखाएगा।

क्या यह इंडियन नेवी के लिए बनाया गया?

GSAT-7R खास तौर पर इंडियन नेवी के लिए बनाया गया है और यह 2013 में लॉन्च हुए GSAT-7 रुक्मिणी सैटेलाइट की जगह लेगा।

IANS की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अपग्रेडेड पेलोड के साथ, GSAT-7R को इंडियन नेवी के लिए सुरक्षित, मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन को बढ़ाने और जरूरी समुद्री इलाकों में इसकी ऑपरेशनल पहुंच को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह सैटेलाइट नेवी के लिए कनेक्टिविटी को काफी बढ़ाएगा। यह ज्यादा कैपेसिटी वाली बैंडविड्थ भी देगा, जिससे दूर-दराज के इलाकों तक डिजिटल एक्सेस बेहतर होगा। इससे सिविलियन एजेंसियों को मदद मिलेगी और स्ट्रेटेजिक एप्लीकेशन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

दूसरी ओर, NASA के Axiom-4 मिशन से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के लौटने के बाद भारत गगनयान प्रोजेक्ट के लिए तैयारी कर रहा है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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