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गगनयान मिशन में एक और मील का पत्थर पार, इसरो ने सफलतापूर्वक विकसित किया सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम

गगनयान मिशन के लिए 'सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम' की सफलता इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ISRO न केवल अंतरिक्ष तकनीक में आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि वह जटिल और संवेदनशील मानव मिशनों को सफलतापूर्वक संचालित करने की दिशा में पूरी तरह तैयार है।

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इसरो ने सर्विस मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली का सफल परीक्षण पूरा किया (फोटो- ISRO)

भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन को लेकर एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शनिवार को घोषणा की कि उसने गगनयान मिशन के लिए 'सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम' (SMPS) का विकास सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह घोषणा SMPS के योग्यता परीक्षण कार्यक्रम (Qualification Test Program) के पूर्ण होने के बाद की गई।

क्या है सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम (SMPS)

SMPS यानी सर्विस मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली गगनयान मिशन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह प्रणाली अंतरिक्ष यान के ऑर्बिटल मॉड्यूल को नियंत्रण और दिशा देने, कक्षा में समायोजन (orbit raising), डी-ऑर्बिटिंग (वापसी की प्रक्रिया), और मिशन निरस्तीकरण (mission abort) जैसे कार्यों में सहायता करती है।

दो मुख्य घटक

ISRO के अनुसार, यह प्रणाली एक द्वि-प्रणोदक आधारित विनियमित प्रणाली (bi-propellant regulated system) है, जिसमें दो मुख्य घटक होते हैं:

  • Liquid Apogee Motor (LAM): यह मुख्य इंजन होता है जो यान को कक्षा में ले जाने और उसे नीचे लाने (de-boost) का कार्य करता है।
  • Reaction Control System (RCS) Thrusters: ये छोटे इंजिन होते हैं जो यान के दिशा और संतुलन को नियंत्रित करते हैं, विशेषकर ऑन-ऑर्बिट कंट्रोल के दौरान।

'हॉट टेस्ट' की सफलता

ISRO ने शुक्रवार को एक पूर्ण अवधि का हॉट टेस्ट किया जो 350 सेकंड (लगभग 6 मिनट) तक चला। यह परीक्षण फ्लाइट ऑफ-नॉमिनल मिशन प्रोफाइल के तहत किया गया, जिसका मतलब है कि सिस्टम को असामान्य या आपातकालीन परिस्थितियों में कैसे काम करना चाहिए, इसका मूल्यांकन किया गया। ISRO ने कहा- “परीक्षण के दौरान प्रणोदन प्रणाली का समग्र प्रदर्शन पूर्व-परीक्षण पूर्वानुमानों के अनुसार सामान्य था।”

गगनयान मिशन: भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान की शुरुआत

गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष यात्री (गगनयात्री) को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में भेजा जाएगा। इस मिशन की लॉन्च 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में संभावित है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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