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Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट एयरस्पेस बंद, भारत खाड़ी शहरों से चलाएगा 58 स्पेशल फ्लाइट; अमीर लाखों यूरो चुकाने को तैयार

Iran Israel War : खाड़ी क्षेत्र तक फैल चुके ईरान युद्ध ने हवाई सफर को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिससे हजारों यात्री अलग-अलग हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। आम लोग उड़ानों के दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं कुछ संपन्न यात्री भारी रकम चुकाकर उन सुरक्षित हवाई अड्डों के जरिये यूरोप के लिए उड़ानों के जरिये निकल रहे हैं, जहां ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा नहीं है। फिलहाल, भारत युद्ध प्रभावित शहरों से 58 स्पेशल फ्लाइट संचालित करने का फैसला किया है।

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खाड़ी देशों से भारत चलाएगा 58 स्पेशल फ्लाइट (फोटो-AI)

Iran Israel War : अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण मध्य पूर्व के अधिकांश हवाई क्षेत्र बंद या प्रतिबंधित हैं। ऐसे में भारतीय एयरलाइनों ने वहां फंसे यात्रियों को वापस लाने के लिए बुधवार को 58 उड़ानें संचालित करने की पहल की है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि 4 मार्च को कुल 58 उड़ानें संचालित करने की योजना है, जिनमें 30 उड़ानें इंडिगो और 23 उड़ानें एयर इंडिया तथा एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा चलाई जाएंगी। भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच उड़ान भरने वाली विदेशी एयरलाइंस भी सीमित परिचालन कर रही हैं, जो हवाई क्षेत्र और परिचालन स्थितियों पर निर्भर है। वहीं, खाड़ी क्षेत्र तक फैल चुके ईरान युद्ध ने हवाई सफर को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिससे हजारों यात्री अलग-अलग हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। आम लोग उड़ानों के दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं कुछ संपन्न यात्री भारी रकम चुकाकर उन सुरक्षित हवाई अड्डों के जरिये यूरोप के लिए उड़ानों के जरिये निकल रहे हैं, जहां ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा नहीं है। पिछले सप्ताहांत जंग छिड़ने के उपरांत दुबई, अबू धाबी और दोहा के प्रमुख हवाई अड्डे बंद कर दिए गए, जिसके बाद चार्टर विमानों की मांग अचानक आसमान छूने लगी। कुछ लोग सुरक्षित निकलने के लिए दो लाख यूरो (करीब 2.32 लाख अमेरिकी डॉलर) तक चुकाने को तैयार हैं। इसी बीच स्पाइसजेट इस दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए संयुक्त अरब अमीरात से भारत के लिए कई विशेष उड़ानें संचालित कर रही है। सुचारू कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त उड़ानें भी निर्धारित की गई हैं।

इन देशों से चलेंगी फ्लाइट

मंत्रालय ने कहा कि भारतीय एयरलाइनों ने अपने शेड्यूल में संतुलित बदलाव किए हैं। लंबी और अति-लंबी दूरी की उड़ानों को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र से बचते हुए वैकल्पिक मार्गों से धीरे-धीरे फिर शुरू किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एयर इंडिया, इंडिगो, स्पाइसजेट और आकासा एयर दुबई और फुजैराह जैसे खाड़ी शहरों से कई विशेष उड़ानें संचालित करेंगी। ये उड़ानें नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोच्चि, अहमदाबाद और तिरुवनंतपुरम जैसे भारतीय हवाईअड्डों पर उतरेंगी। हालांकि अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे तब तक दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट या अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट न जाएं, जब तक संबंधित एयरलाइन की ओर से उन्हें पुष्टि किए गए प्रस्थान समय की जानकारी न मिल जाए।

दुबई का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुला है, और केवल कुछ वाणिज्यिक उड़ानों को अनुमति दी गई है। एमिरेट्स और इंडिगो सीमित उड़ानें चला रहे हैं और अपनी वेबसाइट पर लगातार अपडेट दे रहे हैं। एतिहाद एयरवेज ने कहा है कि अबू धाबी से निर्धारित उड़ानें रद्द हैं और 5 मार्च को दोपहर 2 बजे (स्थानीय समय) तक परिचालन निलंबित रहेगा। हालांकि यूएई अधिकारियों के समन्वय से कुछ कार्गो और प्रत्यावर्तन (रिपैट्रिएशन) उड़ानें चलाई जा सकती हैं।

टिकट के दाम बढ़ाने पर नजर

भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच उड़ान संचालित करने वाली विदेशी एयरलाइंस भी परिचालन और हवाई क्षेत्र की स्थिति के आधार पर सीमित सेवाएं दे रही हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा, "यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी एयरलाइंस को निर्देश दिया गया है कि वे यात्रियों के साथ पारदर्शी संवाद बनाए रखें और रिफंड, रीशेड्यूलिंग तथा अन्य सहायता संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करें। मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह लगातार एयरलाइंस के संपर्क में है और हवाई किरायों पर नजर रख रहा है ताकि इस अवधि में टिकट की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी न हो।

चार्टर विमान का सहारा ले रहे लोग

पीटीआई/भाषा के हवाले से दुबई, अबू धाबी और दोहा के प्रमुख हवाई अड्डे बंद कर दिए गए, जिसके बाद चार्टर विमानों की मांग अचानक आसमान छूने लगी। कुछ लोग सुरक्षित निकलने के लिए दो लाख यूरो (करीब 2.32 लाख अमेरिकी डॉलर) तक चुकाने को तैयार हैं। आम तौर पर सुरक्षित और शानदार ठिकाने के रूप में पहचाने जाने वाले दुबई से अब लोग जल्द से जल्द निकलना चाहते हैं। कई यात्री सड़क मार्ग से करीब चार घंटे की दूरी तय करके मस्कट (ओमान) या फिर 10 घंटे से अधिक दूरी पर स्थित सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंच रहे हैं। वहां पहुंचकर वे उपलब्ध गिनी-चुनी वाणिज्यिक उड़ानों में जगह तलाश रहे हैं या फिर चार्टर विमान का सहारा ले रहे हैं। हालांकि युद्ध शुरू होने के बाद इनकी कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं।

फ्रांस की निजी विमानन कंपनी ’जेट-वीआईपी’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अल्ताय कुला ने कहा, "मांग इतनी अधिक है कि हम चाहकर भी जरूरत के मुताबिक विमान उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। कुला ने बताया कि सामान्य दिनों में रियाद से पुर्तगाल के पोर्टो तक 16 यात्रियों की क्षमता वाले निजी जेट के चार्टर की कीमत लगभग एक लाख यूरो (करीब 1,15,800 अमेरिकी डॉलर) होती है, लेकिन इन दिनों यह कीमत दोगुनी हो चुकी है।

दो लाख यूरो तक पहुंची कीमत

उन्होंने कहा कि कीमतों में यह बढ़ोतरी विमानों की कमी, परिचालन लागत और ऑपरेटर के जोखिम आकलन को दर्शाती है। यह कोई मनमानी कीमत नहीं है। विमाना प्राइवेट जेट्स’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमीर नाराण ने कहा कि किराया प्रस्थान स्थल, विमान के प्रकार और मार्ग की पाबंदियों के अनुसार बदल सकता है। बताया कि खाड़ी क्षेत्र से यूरोप तक की उड़ानों के लिए इन दिनों कीमतें 1.5 लाख यूरो (करीब 1,73,800 अमेरिकी डॉलर) से लेकर दो लाख यूरो तक पहुंच चुकी हैं।

रियाद और मस्कट जैसे चालू हवाई अड्डों तक पहुंचने के लिए कुछ यात्री निजी सुरक्षा कंपनियों की सेवाएं ले रहे हैं, जो साधारण कारों से लेकर बड़े कोच बसों तक में उनके परिवहन का इंतजाम करती हैं।

ब्रिटेन की जोखिम प्रबंधन एवं सुरक्षा कंपनी ’अल्मा रिस्क’ के परिचालन एवं योजना निदेशक इयान मैककॉल ने कहा कि भारी यातायात के कारण ओमान की सीमा चौकियों पर प्रतीक्षा समय चार घंटे तक पहुंच सकता है, जबकि इस पूरी व्यवस्था की लागत हजारों डॉलर तक जा रही है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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