देश

'रील बनाने आए थे राहुल गांधी, बाहर से लाए थे लोग...', कांग्रेस नेता की लोको पायलट से मुलाकात पर बोला रेलवे, एक्शन की तैयारी

Rahul Gandhi met Loco Pilots: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर राहुल गांधी और लोको पायलटों की मुलाकात पर उत्तर रेलवे के चीफ पीआरओ दीपक कुमार ने कहा है कि राहुल गांधी 8 कैमरामैन के साथ नई दिल्ली स्टेशन पहुंचे थे। ऐसा लग रहा है कि वे स्टेशन पर फिल्म या रील बनाने आए हैं।

Image

राहुल गांधी ने लोको पायलटों से मुलाकात की।

Photo : Twitter

Rahul Gandhi met Loco Pilots:कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लोको पायलटों से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने रेवले कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं और उनके मुद्दों को उठाने का आश्वासन दिया। अब भारतीय रेलवे की ओर से राहुल गांधी की इस मुलाकात पर बयान जारी किया गया है। उत्तर रेलवे के चीफ पीआरओ दीपक कुमार ने कहा है कि राहुल गांधी 8 कैमरामैन के साथ नई दिल्ली स्टेशन पहुंचे थे। ऐसा लग रहा है कि वे स्टेशन पर फिल्म या रील बनाने आए हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर रेलवे एक्शन भी ले सकती है। सूत्रों ने कहा है कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर राहुल गांधी ने रिकॉर्डिंग करके प्रतिबंध चीजों को सोशल मीडिया पर दिखाया और रेलवे की छवि को खराब करने की कोशिश की है। राहुल गांधी ने वीडियो बनाने के दौरान कई सेंसिटिव चीजों को इधर से उधर उठा कर रखा है, जिससे रेलवे स्टेशन पर मैनेजमेंट के कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

बाहर से लेकर आए थे लोग

रेलवे की ओर से कहा गया है कि राहुल गांधी ने रेलवे के जिन लोगों पायलट से बात की है उनमें से अधिकतर रेलवे के कर्मचारी और लोको पायलट नहीं थे। उन्हें बाहर से लाया गया था। रेलवे ने साफ तौर से कहा है रेलवे के जिन क्रू मेम्बर्स से बात की वे बाहर से लाए गए थे। बता दें, कल सुबह ही केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि कांग्रेस के नेता रेलवे कर्मचारियों का हौसला तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद शाम को राहुल गांधी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे थे।

लोको पायलटों को नहीं मिलता आराम

राहुल गांधी की मुलाकात के बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से कहा गया कि लोको पायलटों की शिकायत है कि वे लंबी दूरी की रेलगाड़ियां चलाते हैं और अक्सर पर्याप्त विराम के बिना उन्हें फिर ड्यूटी पर भेज दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे अत्यधिक तनाव होता है और एकाग्रता में कमी आती है जो दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। इसके अलावा मुलाकात के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि सरकार द्वारा लोको पायलटों की सभी भर्ती रोक देने के और कर्मचारियों की कमी के कारण (उन्हें) कम आराम मिल पात है। कांग्रेस ने कहा, पिछले चार वर्ष में, रेलवे भर्ती बोर्ड ने हजारों रिक्तियों के बावजूद एक भी लोको पायलट की भर्ती नहीं की। लोकों पायलटों ने आशंका जताई कि यह जानबूझकर उठाया गया कदम मोदी सरकार की रेलवे का निजीकरण करने की योजना है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article