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लापता होने के 9 महीने बाद मिले सेना के 3 जवानों के शव, बर्फ के पहाड़ में थे दबे

भारतीय सेना की एक टीम अक्टूबर 2023 में एक अभियान पर निकली थी, तभी वो हिमस्खलन की चपेट में आ गए। तुरंत बचाव अभियान शुरू हुआ और 4 को छोड़कर बाकी सभी जवानों को बचा लिया गया था।

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लापता जवानों के शव बरामद (फोटो- Indian Army)

KEY HIGHLIGHTS
  • 38 जवानों का एक टुकड़ी निकला था अभियान पर
  • इसी दौरान 4 जवान हो गए थे लापता
  • एक का शव उसी समय हो गया था बरामद

लद्दाख में बर्फ के पहाड़ में दबे भारतीय सैनिकों के शव बरामद कर लिए गए हैं। 18, 700 फीट की ऊंचाई पर लगातार 9 दिनों की खुदाई के बाद 3 लापता जवानों के शव भारतीय सेना को मिले हैं। 9 महीने पहले ये जवान एक हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे।

2023 में लापता हुआ थे जवान

हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल के पर्वतारोहियों ने वीरतापूर्ण इस मिशन को अंजाम दिया है। इस टीम ने तीन उन जवानों के पार्थिव शरीर बरामद किए, जो अक्टूबर 2023 में माउंट कुन के अभियान के दौरान घातक स्लाइड में फंस गए थे।

माउंट कुन अभियान के दौरान हुआ था हादसा

जुलाई 2023 में, HAWS के 38-सदस्यीय पर्वतारोहण अभियान ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में माउंट कुन को जीतने के लिए प्रस्थान किया। अभियान 01 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ और टीम को 13 अक्टूबर 2023 तक माउंट कुन को जीतने की उम्मीद थी। इस बर्फीले इलाके में अप्रत्याशित मौसम के कारण कई दिक्कते आईं। बर्फ की दीवार पर रस्सियां लगाते समय, टीम 08 अक्टूबर 2023 को फ़रियाबाद ग्लेशियर पर कैंप 2 और कैंप 3 के बीच 18,300 फ़ीट से अधिक की ऊंचाई पर अचानक हिमस्खलन की चपेट में आ गई। इनमें से चार को छोड़कर बाकी को बचा लिया गया था।

4 जवान गए थे बर्फ में दब

बाकी चार सदस्य घातक स्लाइड में फंस गए। अभियान दल ने टीम के सदस्यों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, तब काफी कोशिशों के बाद टीम केवल लांस नायक स्टैनज़िन तरगैस के पार्थिव शरीर को ही बरामद कर सकी। हवलदार रोहित, हवलदार ठाकुर बहादुर आले और नायक गौतम राजबंशी के शव बर्फ और बर्फ की परतों के नीचे दबे हुए एक गहरी दरार में फंसे रहे। जिसके बाद अब उनकी लाश को बरामद किया गया है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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