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हवा में थी चेन्नई-गुवाहाटी फ्लाइट, अचानक बेहोश हुआ यात्री; सेना के डॉक्टर मेजर मुकुंदन ने यूं बचाई जान

चेन्नई से गुवाहाटी जा रही इंडिगो फ्लाइट में उड़ान के दौरान 75 वर्षीय यात्री को हाइपोग्लाइसीमिया की शिकायत होने पर भारतीय सेना के डॉक्टर मेजर मुकुंदन ने इलाज दिया। हवा में सीमित संसाधन होने पर भी मेजर ने पीड़ित की जान बचा ली।

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फाइल फोटो-टाइम्स नाउ नवभारत

चेन्नई से गुवाहाटी जा रही इंडिगो फ्लाइट संख्या 6E-6011 में 75 वर्षीय यात्री की हवा में अचानक तबीयत खराब हो गई और वह बेहोश गए। वह पसीना-पसीना होने के साथ ही हाथ पैर ठंडे पड़ गए। जानकारी के मुताबिक, शायद वह हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण से ग्रसित थे। लिहाजा, केबिन क्रू ने तुरंत ऑक्सीजन की व्यवस्था की और और मेडिकल हेल्प के लिए विमान में अनाउंस किया। ऐसे में छुट्टी से लौट रहे सेना के डॉक्टर मेजर मुकुंदन ने तुरंत जवाब दिया और मरीज का ट्रीटमेंट शुरू किया।

मरीज को क्या थी समस्या

घटना 14 जुलाई की शाम करीब साढे 6 बजे की बताई जा रही है। सेना ने बताया कि डॉक्टर मेजर मुकुंदन ने मरीज को अर्धचेतन अवस्था में पाया। हालांकि, इलाज के बाद उनकी पुतलियां दोबारा रिएक्टिव हुईं। मुकुंदन के मुताबिक, पैसेंजर में हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण प्रतीत हो रहे थे। दरअसल, हाइपोग्लाइसीमिया एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें सुगर का स्तर मानक सीमा से कम हो जाता है। लेकिन, हवा में सीमित संसाधनों के साथ मेजर मुकुंदन ने पीड़ित के ऑक्सीजन लेवल की निगरानी रखते हुए उसे चीनी और ओआरएस दिया।

हालांकि, गुवाहाटी में उतरने पर रोगी को हवाई अड्डे के इमरजेंसी वॉर्ड में ट्रांसफर कर दिया गया। मेजर मुकुंदन की त्वरित और निस्वार्थ सेवा और विमान चालक दल के सहयोग से जमीन से काफी ऊंचाई पर एक यात्री की जान बच गई।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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