ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन एयरफोर्स के 80 लाख रुपये के आगे लगते रहे 9 से 18 करोड़, हथियारों की दौड़ में अब IAF ने उठाया क्या कदम?
- Edited by: Nitin Arora
- Updated Feb 9, 2026, 05:13 PM IST
IAF News: नए हथियार जब मैदान में होंगे तो हवाई युद्ध का कॉस्ट इक्वेशन हमेशा के लिए बदल जाएगा। दुश्मन 50 लाख के हथियार छोड़ने से पहले सोचेगा कि उसको बेहद सस्ती कीमत पर खत्म कर दिया जाएगा।
हथियारों की दौड़ में अब IAF ने उठाया क्या कदम?
Indian Air Force Defence: ऑपरेशन सिंदूर के सबक ने रातों-रात भारत के एयर-डिफेंस की रणनीति को बदल दिया है। जब मई 2025 में पाकिस्तान एयर फोर्स के F-16 और JF-17 विमानों ने अपने एयरस्पेस के अंदर से स्टैंड-ऑफ हथियार और ग्लाइड बम दागे, तो IAF को कीमती आकाश-NG और बराक-8 MRSAM इंटरसेप्टर इस्तेमाल करने पड़े, जिनकी कीमत 9-18 करोड़ रुपये प्रति इंटरसेप्टर थी, जबकि दुश्मन के हथियारों की कीमत कभी-कभी 80 लाख रुपये प्रति हथियार से भी कम थी।
इस कड़वे गणित ने एक जरूरी, टॉप-प्रायोरिटी बदलाव को जन्म दिया है। भारतीय वायु सेना अब DRDO के हाई-पावर डायरेक्टेड एनर्जी वेपन प्रोग्राम को एयर-लॉन्च किए गए प्रिसिशन-गाइडेड हथियारों, मंडराने वाले ड्रोन और क्रूज-मिसाइलों के बड़े हमलों का अटैक करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा रही है।
अगर यह प्रोग्राम यूज में आ जाता है कि दुश्मन के बम इत्यादि से निपटने के लिए एक बार के इस्तेमाल में सिर्फ बिजली का खर्च आएगा। जी हां, कुछ सौ रुपये, जबकि खतरे की कीमत करोड़ों में होती है।
idrw ने एक सीनियर IAF एयर डिफेंस अधिकारी के हवाले से कहा कि सिंदूर के दौरान हमने भविष्य देखा। दुश्मन फाइटर जेट्स के साथ नहीं आएगा। वह सैकड़ों सस्ते, हवा से लॉन्च किए जाने वाले स्मार्ट हथियारों और ड्रोन के झुंड के साथ आएगा। आप इसका जवाब हमेशा 15 करोड़ रुपये की मिसाइलों से नहीं दे सकते। आप इसका जवाब रोशनी से देंगे।
100–300 kW सिस्टम पहले से ही एडवांस्ड टेस्टिंग में
DRDO की दो पैरेलल DEW स्ट्रीम – 100 kW क्लास का 'प्रोजेक्ट दुर्गा-I' और ज्यादा पावरफुल 250–300 kW 'दुर्गा-II', दोनों ने क्रिटिकल डिजाइन रिव्यू पास कर लिया है और अब फुल-स्केल डेमोंस्ट्रेटर हार्डवेयर की ओर बढ़ रहे हैं।
दुर्गा-I (100–150 kW): ट्रक पर लगा हुआ, बेस-डिफेंस और रनवे, रडार साइट्स और कमांड सेंटर्स की पॉइंट प्रोटेक्शन के लिए डिजाइन किया गया है। इसके सबसोनिक क्रूज मिसाइलों के खिलाफ 8–12 km और ड्रोन के खिलाफ 4–6 km की जानलेवा रेंज हासिल करने की उम्मीद है।
दुर्गा-II (250–300 kW): बड़ा, ट्रेलर-बेस्ड सिस्टम जिसमें हवा में सांस लेने वाले खतरों के खिलाफ 15–20 km और सुपरसोनिक PGM के खिलाफ 10 km तक की एंगेजमेंट रेंज है। मौजूदा IAF एयर-डिफेंस ग्रिड के साथ इंटीग्रेशन के लिए प्लान किया गया है।
दोनों सिस्टम LASTEC (दिल्ली में DRDO की लेजर लेबोरेटरी) द्वारा विकसित फाइबर-लेजर कंबाइनर और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टोंबो इमेजिंग जैसे प्राइवेट पार्टनर से लाइसेंस प्राप्त सॉलिड-स्टेट पावर स्केलिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। बीम कंट्रोल एक स्वदेशी एडेप्टिव-ऑप्टिक्स पैकेज द्वारा किया जाता है जो वायुमंडलीय गड़बड़ी के बावजूद भी तेजी से आगे बढ़ रहे टारगेट पर डिफ्रैक्शन-लिमिटेड स्पॉट बनाए रख सकता है।
DRDO को गणतंत्र दिवस 2027 तक ड्रोन के खिलाफ लाइव इंटरसेप्ट के लिए पहला 30 kW टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर देने का निर्देश दिया गया है, जिसके बाद 2028 में यूजर ट्रायल के लिए 100 kW का टैक्टिकल सिस्टम दिया जाएगा। पूरी 250–300 kW दुर्गा-II बैटरी को 2029–2031 के बीच शामिल करने का लक्ष्य है, जो ओरिजिनल शेड्यूल से कम से कम पांच साल पहले है।
IAF ने पहले ही पश्चिमी और पूर्वी सेक्टरों में फॉरवर्ड बेस पर परमानेंट DEW साइट्स के लिए जगहें तय कर ली हैं, जो S-400 और आकाश-NG बैटरी के साथ होंगी ताकि लेयर्ड 'हार्ड-किल + सॉफ्ट-किल' बबल बनाए जा सकें। जब ये नए हथियार मैदान में होंगे तो हवाई युद्ध का कॉस्ट इक्वेशन हमेशा के लिए बदल जाएगा। दुश्मन 50 लाख के हथियार छोड़ने से पहले सोचेगा कि उसको बेहद सस्ती कीमत पर खत्म कर दिया जाएगा।
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