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चीन को लगेगी मिर्ची: अमेरिकी जेट F-15 के साथ IAF उड़ाएगी राफेल, युद्धाभ्यास पर पुतिन की भी निगाहें

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 3, 2023, 11:27 AM IST

India-US Combat Exercise: भारत और अमेरिकी वायुसेना के बीच 10 से 21 अप्रैल के बीच युद्धाभ्यास आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास पश्चिम बंगाल में होगा, जिसमें दोनों सेनाओं की ओर से अत्याधुनिक फाइटर जेट भाग लेंगे। चीन और रूस की निगाहें दोनों देशों के बीच होने जा रहे इस अभ्यास पर होंगी।

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भारत और अमेरिका की वायु सेनाएं करेंगी युद्धाभ्यास

Photo : PTI

Indian Air Force: भारतीय वायु सेना (IAF) जल्द ही अमेरिका की वायु सेना के साथ मिलकर युद्धाभ्यास शुरू करने जा रही है। यह युद्धाभ्यास कई मायनों में महत्वपूर्ण होने जा रहा है, क्योंकि 11 दिनों तक चलने वाले इस अभ्यास में भारत की ओर से राफेल विमान अपना शौर्य दिखाएंगे तो अमेरिकी लड़ाकू जेट एक-15 भी इसमें भाग लेंगे।

यह सैन्य अभ्यास ऐसे समय पर होने जा रहा है, जब सैन्य झड़पों के चलते बीते तीन सालों में चीन के साथ भारत के रिश्ते बेहद खराब दौर से गुजर रहे हैं। दूसरी तरफ, दुनिया यूक्रेन युद्ध को लेकर दो धड़ों में बंटी हुई है। ऐसे में अमेरिका और भारत के बीच होने वाले इस अभ्यास पर चीन के साथ रूस की भी निगाहें होंगी।

पश्चिम बंगाल में शौर्य दिखाएंगी वायु सेनाएं

अमेरिका और भारत के बीच होने वाला यह युद्धाभ्यास 10 अप्रैल से 21 अप्रैल तक चलेगा। दोनों सेनाओं की ओर से इस अभ्यास को Cope India नाम दिया गया है। यह सैन्य अभ्यास पश्चिम बंगाल के कलईकुंडा एयरबेस पर आयोजित किया जाएगा। इसमें भारत की ओर से राफेल, सुखोई-30, तेजस और सी-17 ग्लोब मास्टर जैसे विमान भाग लेंगे। वहीं अमेरिका अपने अत्याधुनिक फाइटर जेटएफ-15 स्ट्राइक ईगल जेट का इस्तेमाल करेगा। इस युद्धाभ्यास में जापान ऑब्जर्वर की भूमिका निभाने जा रहा है। माना जा रहा है कि यह युद्धाभ्यास दोनों सेनाओं की ताकतों में इजाफा करेंगी और आपसी समन्वय स्थापित करने में भी मददगार साबित होगा।

अमेरिका के काफी करीब आया है भारत

बता दें, बीते कुछ सालों में भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते रणनीतिक रूप से काफी मजबूत हुए हैं। दोनों देश एक-दूसरे के बीच आपसी संबंधों को काफी मायने देते हैं। अमेरिका खुलकर भारत का समर्थन करने की बात कह चुका है, यहां तक की वह भारत का प्रमुख सैन्य साझेदार भी बनने की इच्छा जता चुका है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका सीधे तौर पर भारत को हथियारों की पेशकश कर चुका है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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