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बिहार में बजट पर NDA vs INDIA, कहीं खुशी-कहीं गम; जानें किसने क्या कहा

Bihar Politics: बजट को लेकर बिहार में सियासी बवाल का दौर तेज हो चुका है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ राजग ने बजट पर खुशी जाहिर की है, तो वहीं विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA के नेताओं ने नाराजगी जताई है। माना जा रहा है कि अगले साल 2024 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में इस बजट की छाप देखी जा सकती है।

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बिहार की सियासत में बजट पर बवाल।

INDIA vs NDA: बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने मंगलवार को दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय बजट में 'अभूतपूर्व' सहायता की घोषणा करके राज्य के लिए 'खजाना खोल दिया है', जो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए 'एजेंडा तय करेगा।' हालांकि, विपक्ष का मानना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के केंद्र में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख गठबंधन सहयोगी होने के बावजूद, केंद्र सरकार ने बिहार के साथ बुरा व्यवहार किया। उसने घोषणा की कि विशेष श्रेणी के दर्जे की मांग से 'एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी।'

बिहार के मंत्री ने पीएम मोदी का जताया आभार

राज्य के संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने विधानसभा में कहा कि आज दिल्ली में बिहार के लिए अभूतपूर्व मदद की घोषणा की गई है। उन्होंने दावा किया,' राज्य के लोग बजट में किए गए प्रावधानों से अभिभूत हैं, जिसके लिए हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धन्यवाद देते हैं।’’ राजद, कांग्रेस और वामदलों के विधायकों ने विशेष दर्जा न दिए जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया।

विपक्षी दलों ने विधानसभा में काटा बवाल

राजद, कांग्रेस और वाम दलों के विधायकों के इस मुद्दे को लेकर से भोजनावकाश के पहले हंगामा और नारेबाजी किये जाने पर सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी थी। विजय चौधरी ने यह भी कहा , 'इन लोगों (विपक्ष) को याद रखना चाहिए कि विशेष दर्जा की मांग को तब भी ठुकरा दिया गया था, जब वे केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा थे......उनका व्यवहार उनकी चिंता के कारण है।'

आगामी विधानसभा चुनाव पर कितना असर?

मंत्री ने कहा, 'आज अगले साल होने वाले चुनाव (बिहार विधानसभा चुनाव) के लिए एजेंडा तय किया गया है। बिहार के लोग विपक्ष से नाराज हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद कर रहे हैं।' सदन में मौजूद मुख्यमंत्री सहित सत्ता पक्ष के सदस्यों ने अपनी मेजें थपथपाकर उनकी बातों का समर्थन किया। बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने एक बयान में आरोप लगाया, 'आज के बजट ने बिहार के लोगों को फिर निराश किया है। बिहार को प्रगति पथ पर ले जाने के लिए एक ‘रिवाइवल प्लान’ की जरूरत थी और जिसके लिए विशेष राज्य के दर्जे के साथ विशेष पैकेज की सख़्त जरूरत है।' वह तब सदन में अनुपस्थित थे।

बजट 2024 पर कहीं खुशी कहीं गम

राजद नेता ने कहा, 'पलायन रोकने, प्रदेश का पिछड़ापन हटाने तथा उद्योग धंधों के साथ साथ युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए हम विशेष राज्य के दर्जे की मांग से इंच भर भी पीछे नहीं हटेंगे।' हालांकि, उपमुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि केंद्र ने बजट में बिहार के लिए 'खजाना खोल दिया है।' राज्य के वित्त मंत्री चौधरी ने संवाददाताओं से कहा, 'यह एक ऐतिहासिक बजट है, जिसके लिए प्रधानमंत्री मोदी बधाई के पात्र हैं। राज्य में एक्सप्रेसवे, नए बिजली संयंत्र और मेडिकल कॉलेज बनेंगे। बाढ़ नियंत्रण और पर्यटन के विकास सहित हर पहलू का ध्यान रखा गया है।'

'केंद्र ने बिहार को धोखा दिया है'

जदयू के वरिष्ठ नेता और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि यह एक बेहतरीन बजट है, जो अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले राजग के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा। हालांकि, भाकपा (माले) लिबरेशन के विधायक संदीप सौरव ने कहा कि केंद्र ने बिहार को धोखा दिया है क्योंकि राज्य को अपने समग्र विकास के लिए विशेष श्रेणी के दर्जे से कम कुछ भी नहीं चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक बार की वित्तीय सहायता, वह भी बहुत छोटी, उद्देश्य की पूर्ति नहीं करेगी। उन्होंने दावा किया , 'बिहार के लोग जानते हैं कि राजग सरकार को राज्य के कल्याण में कोई दिलचस्पी नहीं है...वे विधानसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगियों को सबक सिखाएंगे। राजग को 2025 में अपमानजनक हार का सामना करना पड़ेगा।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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