चंद्रगुप्त मौर्य और धनानंद के बीच संघर्ष लगभग 323 से 321 ईसा पूर्व के बीच लड़ा गया, जो मगध में मौर्य साम्राज्य की स्थापना का निर्णायक आधार बना। नंद वंश के प्रभावशाली शासक धनानंद को हराने में चंद्रगुप्त के साथ उनके गुरु चाणक्य की रणनीति और दृढ़ संकल्प ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चाणक्य ने धनानंद द्वारा किए गए अपमान के बाद नंद वंश का अंत करने का प्रण लिया था। इसी उद्देश्य से उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य को तैयार किया और दोनों ने मिलकर पाटलिपुत्र पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की। अंततः धनानंद पराजित हुआ और मौर्य साम्राज्य की नींव पड़ गई, जो भारतीय इतिहास के सबसे शक्तिशाली साम्राज्यों में से एक बना।
सिकंदर 326 ईसा पूर्व में भारत आया था, जब मगध पर नंद वंश का शासन था। उसने ईरान से उत्तर-पश्चिम भारत में प्रवेश किया और झेलम नदी (हाइडस्पेश) के किनारे राजा पोरस से भीषण युद्ध लड़ा, जिसे हाइडस्पेश का युद्ध कहा जाता है। इस युद्ध में सिकंदर विजयी हुआ, लेकिन बाद में वह अपनी सेना के थक जाने और प्रतिरोध के कारण वापस लौट गया।
सिकंदर की मौत के बाद, कोई एक व्यक्ति सिंहासन पर नहीं बैठा, बल्कि उसके साम्राज्य को उसके सेनापतियों, जिन्हें डायडोची कहा जाता था, ने आपस में विभाजित कर लिया। ये सेनापति साम्राज्य के विभिन्न हिस्सों पर नियंत्रण के लिए आपस में लड़ने लगे और अंततः साम्राज्य कई अलग-अलग राज्यों में बंट गया। सेल्युकस, सिकंदर महान के प्रमुख सेनापतियों में से एक था। सिकंदर की मृत्यु के बाद उसने भारतीय और ईरानी क्षेत्रों सहित कई विजित प्रांतों पर अधिकार कर लिया और आगे चलकर अपना स्वतंत्र साम्राज्य स्थापित किया, जिसे इतिहास में सेल्यूसिड साम्राज्य (Seleucid Empire) के नाम से जाना जाता है।
सेल्युकस ने भारत पर आक्रमण इसलिए किया क्योंकि वह सिकंदर महान द्वारा जीते गए भारतीय क्षेत्रों पर दोबारा नियंत्रण स्थापित करना चाहता था। उसका उद्देश्य मैसेडोनियन साम्राज्य के पूर्व भारतीय क्षत्रपों पर अपना अधिकार पुनः कायम करना था। यह संघर्ष 305 से 303 ईसा पूर्व के बीच मौर्य साम्राज्य के संस्थापक सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के साथ हुए सेल्युकस-मौर्य युद्ध के रूप में सामने आया।
सेल्यूकस ने सिकंदर के साम्राज्य के पूर्वी क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए भारत पर चढ़ाई की थी, जिसे चंद्रगुप्त मौर्य ने जीत लिया था। सेल्युकस 305 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य से युद्ध में पराजित हुआ था। यह संघर्ष 305–303 ईसा पूर्व के बीच चला था, और अंत में चंद्रगुप्त मौर्य विजयी हुए।
चंद्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस से अरिया (हेरात), अराकोसिया (कंधार), परोपनिसादे (काबुल), और जेड्रोसिया (आधुनिक बलूचिस्तान के कुछ हिस्से) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र जीते। यह संधि 305-303 ईसा पूर्व में सेल्यूसिड-मौर्य युद्ध के बाद हुई थी, जिसमें चंद्रगुप्त विजयी हुए और सेल्यूकस को अपने क्षेत्र सौंपने पड़े।
युद्ध में हारने के बाद, चंद्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस के बीच एक संधि हुई, जिसके तहत सेल्यूकस ने अपनी बेटी हेलेना का विवाह चंद्रगुप्त से कर दिया। यह विवाह दोनों साम्राज्यों के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने का एक साधन था, जिसने भविष्य में संघर्ष को रोका।