उत्तर भारत इन दिनों गर्मी से त्राहिमाम कर रहा है। लोग आसमान की ओर टकटकी लगाकर देख रहे हैं कि कब बारिश होगी। इस बीच मौसम विज्ञान विभाग ने जुलाई में बारिश को लेकर ऐसी भविष्यवाणी की है जो चिंता पैदा करने वाली है। IMD ने आज जुलाई महीने के लिए अपना मासिक पूर्वानुमान जारी कर दिया है। इसमें उसने बताया है कि जुलाई में इस बार देशभर में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई में पूरे भारत में दीर्घकालिक औसत (Long Period Average-LPA) का लगभग 94 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान है।
IMD ने कहा कि 1971 से 2020 की अवधि के आधार पर जुलाई महीने का दीर्घकालिक औसत वर्षा (LPA) 280.4 मिमी है। विभाग ने स्पष्ट किया कि LPA किसी क्षेत्र में 30 से 50 वर्षों के दौरान दर्ज औसत वर्षा को दर्शाता है और इसी आधार पर मौसमी पूर्वानुमान तैयार किए जाते हैं।
जुलाई में सामान्य से कम बारिश का अनुमान
मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि जुलाई के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की जा सकती है।
हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है।
जून में 40% कम हुई बारिश
मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, जून महीने में पूरे देश में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक असर मध्य भारत पर पड़ा, जहां 50.4 प्रतिशत वर्षा की कमी रही। जून 2026 में देशभर में 99.5 मिमी बारिश हुई, जो 1901 के बाद जून महीने की पांचवीं सबसे कम वर्षा है।कम बारिश की ये हैं 5 बड़ी वजहें
मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि मानसून की कमजोर स्थिति के पीछे पांच प्रमुख कारण रहे-
1. मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन की प्रतिकूल स्थिति
MJO की अनुकूल स्थिति में दक्षिण भारत के ऊपर अधिक बादल बनते हैं और मानसूनी हवाएं इन्हें उत्तर की ओर ले जाकर वर्षा बढ़ाती हैं। इस बार इसकी प्रतिकूल स्थिति के कारण बारिश प्रभावित हुई। बता दें कि भूमध्य रेखा के पास पूर्व दिशा में चलने वाली बादलों, बारिश और हवाओं की एक विशाल प्रणाली है। यह चक्र 30 से 60 दिनों में पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाता है और यह भारतीय मानसून समेत वैश्विक मौसम को बहुत गहराई से प्रभावित करता है
2. जून में एक भी लो-प्रेशर सिस्टम नहीं बना
लो-प्रेशर सिस्टम न बनने से समुद्र से नमी लेकर आने वाली हवाओं को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, जिससे मानसून की गतिविधियां कमजोर रहीं।
3. टाइफून का उत्तर-उत्तर पश्चिम की ओर मुड़ना
जून में बने अधिकांश टाइफून उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में चले गए, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में लो-प्रेशर सिस्टम विकसित नहीं हो सके।
4. अल नीनो का असर
इस महीने अल नीनो की स्थिति उभरने लगी, जिसका भारतीय मानसून पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सामान्यतः अल नीनो के दौरान भारत में वर्षा कम होती है।
5. न्यूट्रल इंडियन ओशन डाइपोल
फिलहाल IOD की स्थिति न्यूट्रल है। यदि यह पॉजिटिव होती तो अल नीनो के प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकती थी और बारिश बढ़ सकती थी।
अगले 2-3 दिनों में आगे बढ़ेगा मानसून
आईएमडी के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। इस दौरान मानसून दमन एवं दीव, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब के अधिकांश हिस्सों और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है।जुलाई में गर्मी से भी राहत नहीं
मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि जुलाई के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। केवल पश्चिम-मध्य भारत के कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या उससे कम रहने की संभावना है। वहीं, न्यूनतम तापमान भी देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। हालांकि, मध्य भारत और पूर्वोत्तर भारत के कुछ सीमित क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य रह सकता है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और (आज की ताजा खबर) के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।
