चंडीगढ़ में हरियाणा सरकार के खातों में IDFC First Bank में हुई 590 करोड़ रुपए की हेराफेरी की पूरी कहानी अब सामने आ चुकी है। IDFC First Bank में काम कर चुका पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि और बैंक का ही पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय इस साजिश के मुख्य मास्टरमाइंड है और ये दोनों ही अब पुलिस की गिरफ्त में है।
उनके साथ ही मास्टरमाइंड अभय की पत्नी स्वाति सिंगला और उसके भाई अभिषेक सिंगला को भी स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो ने गिरफ्तार किया है। यानि पति,पत्नी और साले की तिकड़ी ने इस घोटाले को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई है।
इस घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड विभव ऋषि IDFC First Bank का सेक्टर 32 ब्रांच का पूर्व मैनेजर और फिलहाल चंडीगढ़ के नजदीक पंजाब के मोहाली के जीरकपुर AU Small Finance Bank बैंक का मैनेजर है।
इसके अलावा इस घटना का एक और मुख्य मास्टरमाइंड - अभय कुमार है ये IDFC First Bank का पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर है। रिभव ऋषि के कहने पर अभय कुमार ने अपनी पत्नी स्वाति सिंगला और साले अभिषेक सिंगला के नाम पर फर्जी कंपनियां शुरू की। हरियाणा सरकार के जिन विभागों का पैसा बैंक में मौजूद था उसे इन फर्जी कंपनियों के खातों में डिपार्टमेंटल पेमेंट के तौर पर भेजने की साजिश रची गई।
आधा दर्जन फेक कंपनियां बनाई गईं
इसके लिए स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला को बिजनेस पार्टनर बताते हुए स्वास्तिक देश इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और कैपको, स्वदेश जैसे नामों से आधा दर्जन फेक कंपनियां बनाई गई। सिर्फ स्वास्तिक देश नाम की कंपनी के खातों में ही करीब 300 करोड़ रुपए की रकम ट्रांसफर की गई। गबन के लिए चंडीगढ़ में बैंक खाते ना खोलकर ट्राई सिटी कहे जाने वाले हरियाणा के पंचकूला और पंजाब के मोहाली के इलाके की IDFC First Bank और AU Small Finance Bank की ब्रांचों में खाते खोले गए।
पैसा सीधा इन फर्जी कंपनियों के खातों में आरटीजीएस, चेक और डेबिट नोट के माध्यम से ट्रांसफर
सरकारी विभागों का पैसा सीधा इन फर्जी कंपनियों के खातों में आरटीजीएस, चेक और डेबिट नोट के माध्यम से ट्रांसफर किया गया। एक बार सरकारी खाते से निकलकर पैसा इन फर्जी कंपनियों के अकाउंट में आ गया तो रिभव ऋषि और अभय ने ऐसा सिस्टम बनाया कि उसे पैसे को ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।
इस पैसे का इस्तेमाल दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों में प्रॉपर्टी खरीदने, सोने और हीरे की महंगी ज्वैलरी खरीदने और लग्जरी होटलों के बिल भरने में किया गया। ठगी के पैसे का एक बड़ा हिस्सा शेयर ट्रेडिंग कंपनियों में लगाया गया ताकि उसे कानूनी निवेश के तौर पर दिखाया जा सके।सरकारी खातों से पैसा निकालने के बाद उस पैसे को 1800 से ज्यादा निजी खातों में घुमाया गया ताकि जांच एजेंसियां असली सोर्स तक पहुंच ही ना सके।
हेराफेरी की रकम से जुड़े 1800 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज करवा दिया गया
पूरा मामला सामने आने के बाद IDFC First Bank बैंक के हरियाणा सरकार के खातों से दूसरे खातों में गई हेराफेरी की रकम से जुड़े 1800 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज करवा दिया गया है। जिन खातों को फ्रीज किया गया है उनमें से कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्हें ये जानकारी ही नहीं है कि उनके खातों में आया पैसा इस महाठगी से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय साइबर क्राईम रिर्पोटिंग पोर्टल के जरिए इन ट्रांजेक्शन के लिंक ट्रेस किया जा रहे हैं। अब तक की जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों ने जो फिक्स्ड डिपॉजिट के तहत अपना पैसा बैंक में रखा था उसका ही इस्तेमाल आगे इस मनी ट्रांसफर ट्रेल में किया गया।
आमतौर पर सरकारी विभागों की फिक्स्ड डिपाजिट की रकम सालों-साल तक ऐसे ही बैंकों में पड़ी रहती है इसी वजह से आरोपियों ने इन्हीं फिक्स्ड डिपॉजिट खातों को टॉरगेट किया। पैसे को ट्रांसफर करने के लिए लेयरिंग का सहारा लिया गया और सरकारी खातों से पैसा स्वास्तिक देश स्वदेश और कैपको जैसी फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर करके आगे भेजा गया। जहां इस गबन के पैसे को इन्वेस्ट किया गया वहां की कंपनियों और व्यापारियों को ये भनक तक नहीं थी कि उनकी कंपनियों और प्रोजेक्ट्स में एक बड़े गबन का पैसा इन्वेस्ट किया जा रहा है।
बड़ी बात ये है कि बैंकों में जब भी कोई छोटा या बड़ा ट्रांजैक्शन होता है तो नोटिफिकेशन तुरंत ही खाताधारक को भेजा जाता है। अब हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो इस मामले में ये जांच कर रहा है कि इन खातों के नोटिफिकेशन किस सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को जाते थे और नोटिफिकेशन जाते ही इन ट्रांजैक्शन को संदिग्ध मानते हुए उन कर्मचारियों या अधिकारियों ने तुरंत ही हरियाणा सरकार को इसकी सूचना क्यों नहीं दी।
