Abdul Gani Bhat Passed Away: मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के संस्थापक सदस्य और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़े प्रोफेसर अब्दुल गनी भट का बुधवार को निधन हो गया। अब्दुल गनी ने उत्तरी कश्मीर के सोपोर स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यद्यपि उनकी राजनीतिक विचारधाराएं बिल्कुल अलग थीं, लेकिन मैं उन्हें हमेशा एक बहुत ही सभ्य व्यक्ति के रूप में याद रखूंगा।
अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मुझे वरिष्ठ कश्मीरी नेता और शिक्षाविद् प्रोफेसर अब्दुल गनी भट साहब के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब अधिकांश लोग मानते थे कि आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता हिंसा है तब उन्होंने संवाद का रास्ता अपनाने का साहस दिखाया। इसी कारण उनकी तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी जी और उपप्रधानमंत्री आडवाणी जी से मुलाकात हुई...’’
कौन थे अब्दुल गनी भट?
86 वर्षीय अब्दुल गनी भट पेश से फारसी भाषा के प्रोफेसर थे, लेकिन 1986 में सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। बाद में वह अलगाववादी राजनीति में शामिल हो गए। अब्दुल गनी भटी मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के संस्थापक सदस्यों में से एक है, जिसने 1987 का चुनाव लड़ा था।
अब्दुल गनी फट मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के प्रवक्ता थे। 1993 में उन्होंने और अन्य अलगाववादी नेताओं ने ऑल पॉर्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की स्थापना की थी। 2000 से 2003 तक वह हुर्रियर कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष भी रहे। हालांकि, ऑल पॉर्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस में विभाजन के बाद वह जम्मू-कश्मीर मुस्लिम कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष बने।
समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, कश्मीर में आतंकवाद के चरम समय पर, भट को सैयद अली शाह गिलानी और मसारत आलम जैसे अलगाववादी के बीच एक शांतिप्रिय व्यक्ति माना जाता था। वह (भट) कश्मीर समस्या के समाधान के लिए नई दिल्ली (सरकार) के साथ बातचीत करने का समर्थन करते थे। एक शिक्षक से राजनेता बने अब्दुल गनी भट ने अटल विहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार और बाद में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को केंद्र के साथ बातचीत में शामिल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
भट अभिवाजित हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अंतिम अध्यक्ष थे, क्योंकि केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने के निर्णय के कारण बहुदलीय गठबंधन में विभाजन हो गया था। हुर्रियत के पूर्व अध्यक्ष ने राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए हथियार के इस्तेमाल पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने कश्मीर में लगातार और लंबे समय तक बंद रहने को लेकर भी आवाज उठाई थी।
