तमिलनाडु विधानसभा में राज्यपाल ने नहीं पढ़ा अभिभाषण, छिड़ा भारी विवाद, स्टालिन ने की निंदा
- Edited by: अमित कुमार मंडल
- Updated Jan 20, 2026, 10:41 PM IST
राज्यपाल आर. एन. रवि ने विधानसभा में द्रमुक सरकार द्वारा तैयार परंपरागत अभिभाषण पढ़ने से इसलिए इनकार कर दिया, क्योंकि उसमें कई अप्रमाणित दावे और भ्रामक बयान शामिल थे। लोकभवन ने यह दावा किया। राज्यपाल रवि परंपरागत अभिभाषण की शुरुआत में राष्ट्रगान बजाने की मांग कर रहे थे, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि परंपरा के अनुसार शुरुआत में तमिल थाई वाज़्थु और अंत में राष्ट्रगान बजाया जाता है।
तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि
तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि राज्य विधानसभा में साल के पहले सत्र के दौरान मंगलवार को अपना परंपरागत अभिभाषण पढ़े बिना ही सदन से बाहर चले गए। उन्होंने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण में कथित तौर पर भ्रामक दावे किए जाने के कारण ऐसा किया।
रवि के 2021 में राज्यपाल बनने के बाद से इस तरह का यह उनका चौथा वॉकआउट है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने राज्यपाल के इस कदम की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह उच्च पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है और यह सदन का अपमान है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने नियम, परंपरा और आचार का उल्लंघन कर यह वॉकआउट किया, जो स्वीकार्य नहीं है।
'राज्यपाल का यह व्यवहार तमिल लोगों की भावनाओं के खिलाफ'
स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी संविधान में संशोधन करके राज्यपाल के साल की शुरुआत में अभिभाषण देने के प्रावधान को हटाने का प्रयास करेगी। उन्होंने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कहा गया कि केवल सरकार द्वारा तैयार किया गया अभिभाषण ही आधिकारिक रिकॉर्ड में जाएगा। मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि अनुच्छेद 176 के अनुसार परंपरागत अभिभाषण राज्य सरकार द्वारा तैयार किया जाता है और इसे राज्यपाल को पूरी तरह पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, राज्यपाल को अभिभाषण पर व्यक्तिगत राय व्यक्त करने या किसी हिस्से को छोड़ने का अधिकार नहीं है।
स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल का यह व्यवहार तमिल लोगों की भावनाओं के खिलाफ है। राज्यपाल को राज्य की भलाई, जनता के विकास में रुचि और सच बोलने का कर्तव्य निभाना चाहिए। उसे जनता द्वारा चुनी गई सरकार के फैसलों में सहयोग करना चाहिए। लेकिन वे इसके विपरीत कार्य कर रहे हैं और सार्वजनिक रूप से राजनीति करके राज्य प्रशासन को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह अस्वीकार्य है। राज्यपाल रवि के वॉकआउट के दौरान सरकार और उसके सहयोगी दलों के विधायक खड़े होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने 10 अप्रैल 2023 को द्रमुक संस्थापक सी. एन. अन्नादुरई के कथन को याद किया कि राज्य को राज्यपाल की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से राज्यपाल को सम्मान दिया जाता रहा है।
वर्ष 2022 में रवि ने अपना पहला अभिभाषण पढ़ा था, तब मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक के विधायकों ने वॉकआउट किया था। इसके अगले साल, रवि अचानक सदन से बाहर चले गए, जबकि मुख्यमंत्री स्टालिन ने सरकार द्वारा तैयार किए गए पाठ को नहीं पढ़ने का उल्लेख किया और राज्यपाल ने द्रविड़ शासन प्रणाली जैसे संदर्भों से परहेज किया। रवि ने 2024 में द्रमुक द्वारा तैयार किये गए अभिभाषण को पढ़ने से इनकार कर दिया। बाद में, लोकभवन ने इस अभिभाषण को भ्रामक और सत्य से दूर बताते हुए कहा कि इसे पढ़ना संवैधानिक विडंबना होती। 2025 में उन्होंने अभिभाषण पढ़े बिना वॉकआउट किया और लोकभवन ने कहा था, अभिभाषण की शुरुआत में जब राष्ट्रगान नहीं गाया गया या नहीं बजाया गया, तो राज्यपाल ने सदन को उसके संवैधानिक कर्तव्य की याद दिलाते हुए मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से राष्ट्रगान बजाने की अपील की। रवि 18 सितंबर 2021 को तमिलनाडु के 26वें राज्यपाल बने थे और द्रमुक 10 साल के बाद उस वर्ष सत्ता में आई थी। परंपरा के अनुसार, विधानसभा में साल की शुरुआत में ‘तमिल थाई वाल्थु’ गाया जाता है, उसके बाद राज्यपाल अभिभाषण पढ़ते हैं और अंत में राष्ट्रगान बजाया जाता है।
राज्यपाल का माइक बंद किया गया: तमिलनाडु लोकभवन
राज्यपाल आर. एन. रवि ने विधानसभा में द्रमुक सरकार द्वारा तैयार परंपरागत अभिभाषण पढ़ने से इसलिए इनकार कर दिया, क्योंकि उसमें कई अप्रमाणित दावे और भ्रामक बयान शामिल थे। लोकभवन ने यह दावा किया। राज्यपाल रवि परंपरागत अभिभाषण की शुरुआत में राष्ट्रगान बजाने की मांग कर रहे थे, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि परंपरा के अनुसार शुरुआत में तमिल थाई वाज़्थु और अंत में राष्ट्रगान बजाया जाता है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बिना संबोधन दिए राज्यपाल के बाहर निकलने के कुछ मिनट बाद लोकभवन ने 13 बिंदुओं वाला एक विवरण जारी किया, जिसमें बताया गया कि राज्यपाल ने संबोधन पढ़ने से क्यों इनकार किया। इसमें आरोप लगाया गया कि राज्यपाल का माइक बार-बार बंद किया गया और उन्हें बोलने नहीं दिया गया।
लोकभवन के अनुसार, भाषण में कई अप्रमाणित दावे और भ्रामक बयान हैं। जनता को प्रभावित करने वाले कई गंभीर मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। इसमें तमिलनाडु सरकार के इस दावे को भी सच्चाई से परे बताया गया कि राज्य ने 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। बयान में कहा गया कि कई समझौता ज्ञापन केवल कागजों तक सीमित हैं और वास्तविक निवेश उसका एक छोटा हिस्सा ही है। निवेश के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि चार साल पहले जहां तमिलनाडु प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पाने वाले राज्यों में चौथे स्थान पर था, वहीं अब वह छठे स्थान पर बने रहने के लिए संघर्ष कर रहा है।
लोकभवन ने यह भी आरोप लगाया कि महिला सुरक्षा के मुद्दे को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया, जबकि पॉक्सो के तहत बलात्कार के मामलों में 55 प्रतिशत से अधिक और महिलाओं से छेड़छाड़ के मामलों में 33 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। मादक पदार्थों और नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या, खासकर युवाओं और स्कूली छात्रों में नशे के मामलों में तेज बढ़ोतरी को भी गंभीर चिंता बताया गया। बयान में दावा किया गया कि एक वर्ष में नशे के कारण 2,000 से अधिक, ज्यादातर युवा, आत्महत्या कर चुके हैं। इसके अलावा, दलितों पर अत्याचार और दलित महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में वृद्धि का आरोप लगाते हुए बयान में कहा गया कि इस पर भी भाषण में कोई जिक्र नहीं है। लोकभवन के अनुसार, राज्य में एक वर्ष में लगभग 20,000 लोगों ने आत्महत्या की, यानी प्रतिदिन करीब 65 मामले, और तमिलनाडु को भारत की आत्महत्या राजधानी कहा जाने लगा है, फिर भी सरकार चिंतित नहीं दिखती।
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