जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के बांदीपोरा जिले की गुरेज घाटी में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग को लेकर लोगों का विरोध प्रदर्शन जारी है। यहां के लोग लगातार पांचवें दिन भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि इलाके में डॉक्टरों की स्थायी तैनाती की जाए और इमरजेंसी में मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
लोग हड़ताल पर क्यों बैठे?
यह विरोध प्रदर्शन 30 साल की हसीना बेगम और उनके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के बाद शुरू हुआ। हसीना बेगम तुलैल इलाके की रहने वाली थीं। उनकी मौत 14 अक्टूबर को हुई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में सही मेडिकल फैसिलिटी नहीं होने और इमरजेंसी इलाज में देरी के कारण यह दुखद घटना हुई। हालांकि, इस मामले में मौत के कारणों की जांच की जा रही है।
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डॉक्टरों की स्थायी तैनाती की मांग
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि गुरेज जैसे दूरदराज के इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई है। खासकर गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलना बड़ी चुनौती है। लोगों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को पांच सूत्रीय मांगपत्र सौंपा है। इस मांगपत्र में लोगों की मांग है कि गुरेज के स्वास्थ्य केंद्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ यानी गाइनेकोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट की स्थायी तैनाती हो। इसके अलावा, प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि बगतोर, तुलैल और दावर इलाकों में एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाएं, ताकि खराब रास्तों और मुश्किल मौसम में भी मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा सके।

स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भूख हड़ताल पर बैठे लोग (Times Now Navbharat)
ब्लड बैंक और ऑपरेशन थिएटर भी चाहते हैं लोग
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि दावर के हेल्थ सेंटर में ब्लड बैंक शुरू किया जाए। साथ ही, ऑपरेशन थिएटर को पूरी तरह चालू किया जाए, जहां जरूरत पड़ने पर सिजेरियन यानी ऑपरेशन से बच्चे की डिलीवरी की जा सके। लोगों ने हसीना बेगम और उनके बच्चे की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि दावर के हेल्थ सेंटर में सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े।
स्वास्थ्य विभाग ने उठाया कदम, लेकिन प्रदर्शन जारी
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने सर्दियों के मौसम के लिए दो स्त्री रोग विशेषज्ञों को अस्थायी रूप से कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) दावर में तैनात करने का आदेश दिया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि कुछ समय के लिए डॉक्टरों को भेजने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। वे चाहते हैं कि इलाके में नियमित रूप से डॉक्टर और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहें। महिला और उसके बच्चे की मौत के मामले में प्रशासन ने जांच के आदेश भी दिए हैं।
सर्दियों में और मुश्किल हो जाती है राह
गुरेज घाटी की भौगोलिक स्थिति भी यहां के लोगों के लिए बड़ी चुनौती है। सड़क मार्ग से बांदीपोरा शहर से दावर की दूरी करीब 86 किलोमीटर है। इस रास्ते में लगभग 11,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित राजदान दर्रे को पार करना पड़ता है। अनुकूल मौसम में भी इस सफर में कई घंटे लग सकते हैं। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और कनेक्टिविटी भी टूट जाती है। ऐसे में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना और भी मुश्किल हो जाता है। लोकल लोगों की मांग है कि गुरेज में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जाए, ताकि मुश्किल मौसम में भी लोगों को जरूरी इलाज मिल सके। फिलहाल, प्रशासन की जांच और स्वास्थ्य विभाग के कदमों के बीच भूख हड़ताल जारी है।
