अगर आपके पास वैलिड वीजा है और आप पहले भी कई बार विदेश यात्रा कर चुके हैं, तो क्या एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारी आपसे दोबारा पूछताछ कर सकते हैं? दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने इस सवाल पर अहम बात कही है। अदालत के मुताबिक, वैध वीजा होने के बावजूद इमिग्रेशन अधिकारी किसी यात्री को अतिरिक्त पूछताछ और सुरक्षा जांच के लिए रोक सकते हैं। ऐसा करना अपने आप में गलत या मनमाना नहीं माना जा सकता, अगर अधिकारी अपने अधिकारों के तहत जरूरी जांच कर रहे हों।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक भारतीय नागरिक से जुड़ा है, जिसके पास जर्मनी जाने के लिए वैलिड बिजनेस शेंगेन वीजा था। उस व्यक्ति ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बार-बार एक्स्ट्रा इमिग्रेशन जांच किए जाने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसके पास यात्रा के वैध दस्तावेज होने के बावजूद उसे एयरपोर्ट पर बार-बार अतिरिक्त जांच से गुजरना पड़ता है। इससे उसे परेशानी होती थी। उसने इस प्रक्रिया को अनुचित बताते हुए अदालत से राहत मांगी।
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पहले रद्द हो चुका था शेंगेन वीजा
मामले में सामने आया कि व्यक्ति का पहले जारी किया गया शेंगेन वीजा रद्द कर दिया गया था। इसके बाद नए आवेदन करने पर उसे तीन और वीजा जारी किए गए। हालांकि, पुराने वीजा के रद्द होने के बाद उसके नाम से जुड़ा एक अलर्ट जारी था। केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जर्मन दूतावास ने अलर्ट जारी कर कहा था कि रद्द किए गए वीजा का इस्तेमाल करके संबंधित व्यक्ति या कोई अन्य व्यक्ति जर्मनी की यात्रा नहीं कर सकता। केंद्र के वकील के मुताबिक, यह अलर्ट 31 अक्टूबर 2027 तक वैध था। सरकार ने यह भी कहा कि इमिग्रेशन अधिकारी मौजूदा वीजा की पुष्टि के लिए एयरलाइन अधिकारियों से संपर्क करते थे। जांच के बाद यात्री को हर बार यात्रा करने की अनुमति दी गई थी।
इमिग्रेशन अधिकारियों के अधिकार पर क्या बोला कोर्ट?
14 अक्टूबर को जारी आदेश में न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कहा कि इमिग्रेशन अधिकारी यात्रियों से जरूरी जानकारी मांग सकते हैं। अदालत ने आव्रजन और विदेशियों अधिनियम, 2025 (Immigration and Aliens Act 2025) की धारा 3 का भी उल्लेख किया, जो अधिकारियों को यात्री से आवश्यक जानकारी मांगने का अधिकार देती है। अदालत ने माना कि पुराने वीजा के कैंसिल होने के कारण अतिरिक्त जांच से याचिकाकर्ता को असुविधा हुई, लेकिन केवल इस वजह से अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं बनती।
खारिज हुई याचिका
दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई आधार सामने नहीं आया, जिससे यह माना जाए कि अधिकारियों ने मनमाने तरीके से अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया। व्यक्ति को जांच के बाद हर बार यात्रा करने की अनुमति मिली थी। इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि वैध वीजा (Valid Visa) रखने वाले हर यात्री को बिना वजह रोका जा सकता है। मामला खास परिस्थितियों और पहले जारी किए गए अलर्ट से जुड़ा था। कोर्ट ने इसी संदर्भ में अतिरिक्त जांच को गलत मानने से इनकार किया।
