Congress Rally: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान के बाद दिल्ली के व्यापारियों में उम्मीद जगी है कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली दिवाली के बाद आयोजित की जा सकती है। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने 26 अक्टूबर को खरगे को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। CTI के मुताबिक, खरगे ने व्यापारियों की ओर से ज्ञापन सौंपे जाने के सवाल पर कहा था कि रैली को लेकर आगे का फैसला कांग्रेस पार्टी और INDIA गठबंधन के सहयोगियों से चर्चा के बाद लिया जाएगा।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने खरगे के इस बयान का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दिल्ली के व्यापारियों में उम्मीद जगी है। संगठन ने खरगे से अनुरोध किया है कि दिवाली के पीक कारोबारी सीजन और लाखों लोगों की रोजी-रोटी को ध्यान में रखते हुए रैली दिवाली के बाद कराने का अंतिम निर्णय लिया जाए। CTI का कहना है कि तारीख आगे बढ़ाने से केवल 10 दिन का अंतर पड़ेगा।
राहुल गांधी को लिखा था पत्र
CTI ने बताया कि दिवाली के दौरान कारोबारी गतिविधियों पर संभावित असर और 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की आशंका को लेकर संगठन कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 24 अक्टूबर को ही पत्र लिख चुका है। अब खरगे को लिखे पत्र में भी संगठन ने रैली की तारीख बदलने की अपील दोहराई है।
CTI का दावा है कि अक्टूबर में धरने-प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को करीब 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। संगठन को आशंका है कि यदि दिवाली के पीक सीजन में भी यातायात और बाजारों की आवाजाही प्रभावित हुई, तो कुल कारोबारी नुकसान 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है। ये आंकड़े संगठन के अनुमान हैं।
धनतेरस पर 25 हजार करोड़ के कारोबार का अनुमान
CTI ने अपने पत्र में कहा है कि इस साल धनतेरस 6 नवंबर को है। संगठन के मुताबिक, धनतेरस के मौके पर दिल्ली में सभी सेक्टरों को मिलाकर करीब 25 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। 8 नवंबर को दिवाली और 10-11 नवंबर को भैया दूज तक बाजारों में खरीदारी का पीक सीजन रहता है।
संगठन का कहना है कि त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए बाजारों में पहुंचते हैं। ऐसे में रैली के कारण यातायात या बाजारों तक पहुंच प्रभावित होने से कारोबार पर असर पड़ सकता है।
रामलीला मैदान के आसपास 20 बड़े बाजार
CTI के अनुसार, रामलीला मैदान के करीब पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के लगभग 20 बड़े थोक और खुदरा बाजार हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार, दरियागंज, कमला मार्केट, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, नया बाजार, आजाद मार्केट, दरीबा ज्वेलरी मार्केट, किनारी बाजार, नबी करीम, करोल बाग, झंडेवालान और जामा मस्जिद समेत अन्य बाजार शामिल हैं।
संगठन का दावा है कि इन बाजारों में करीब तीन लाख व्यापारी कारोबार करते हैं। व्यापारियों के परिवारों और दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों को जोड़ने पर लगभग 15 लाख लोगों की रोजी-रोटी इन बाजारों से जुड़ी हुई है। CTI का कहना है कि बड़ी रैली के दौरान लोगों की आवाजाही और यातायात प्रभावित होने का असर इन बाजारों पर भी पड़ सकता है।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन का हवाला
CTI ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा है कि उस दौरान दिल्ली के कई हिस्सों में मेट्रो सेवाओं और सड़क यातायात पर असर पड़ा था। संगठन को आशंका है कि दिवाली के व्यस्त कारोबारी दिनों में यदि इसी तरह की स्थिति बनी, तो व्यापारियों को और नुकसान हो सकता है।
इसी आधार पर CTI ने खरगे से अनुरोध किया है कि व्यापारियों के हितों और त्योहारों के दौरान होने वाले कारोबार को ध्यान में रखते हुए रैली दिवाली के बाद आयोजित की जाए। संगठन को उम्मीद है कि कांग्रेस नेतृत्व INDIA गठबंधन के सहयोगियों के साथ चर्चा करते समय इस मांग पर विचार करेगा।
