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कर्नाटक में हो सकता है 'गोधरा कांड', राम मंदिर के उद्घाटन से पहले कांग्रेस नेता ने क्यों किया ऐसा दावा?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 3, 2024, 05:30 PM IST

Karnataka: कांग्रेस नेता ने कहा, ऐसी घटना की पूरी आशंका है। कुछ संगठनों के प्रमुख कई राज्यों में गए और कुछ भाजपा नेताओं को उकसाया, लेकिन मैं यह बात खुलकर नहीं कह सकता।

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कांग्रेस नेता बीके हरीप्रसाद

Photo : Twitter

Karnataka: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने कर्नाटक में गोधरा कांड जैसी घटना की आशंका जताई है। बुधवार को उन्होंने दावा किया कि अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले कर्नाटक में हिंसा भड़क सकती है और गोधरा जैसी घटना हो सकती है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार को इससे सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि गुजरात में इसी तरह के मौके पर गोधरा में कार सेवकों को आग लगा दी गई थी।

बता दें, 2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद गुजरात में भयानक सांप्रदायिक दंगे हुए थे, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी। पूर्व राज्यसभा सदस्य ने कहा, यहां भी ऐसी ही स्थिति बन सकती है। इसलिए कर्नाटक में किसी भी तरह की अप्रिय घटना की गुंजाइश पैदा नहीं होने देनी चाहिए। अयोध्या जाने के इच्छुक लोगों के लिए सभी व्यवस्थाएं की जानी चाहिए ताकि हमें कर्नाटक में एक और गोधरा ना देखना पड़े।

भाजपा नेताओं को उकसाया गया

हरिप्रसाद ने आरोप लगाया, ऐसी घटना की पूरी आशंका है। मैं जानकारी भी दे सकता हूं। मैं आपको बता सकता हूं कि कुछ संगठनों के प्रमुख कई राज्यों में गए और कुछ भाजपा नेताओं को उकसाया, लेकिन मैं यह बात खुलकर नहीं कह सकता। वे ऐसा कर रहे हैं, वे इस तरह के कृत्य के लिए उकसा रहे हैं। अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए कांग्रेस नेताओं को आमंत्रित किये जाने से जुड़े सवाल पर हरिप्रसाद ने कहा कि इस कार्यक्रम को धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक तौर पर देखा जाना चाहिए।

मोदी और शाह धर्मगुरू नहीं

हरिप्रसाद ने कहा, अगर कोई हिंदू धर्मगुरु राम मंदिर का उद्घाटन करता तो आप और मैं बिना किसी आमंत्रण के वहां पहुंचते। उन्होंने कहा, चार शंकराचार्य हिंदू धर्म के प्रमुख हैं। यदि चारों शंकराचार्य या कोई धर्मगुरु कार्यक्रम का उद्घाटन करता तो मैं भी कार्यक्रम में शामिल होता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह धर्म गुरु नहीं बल्कि राजनीतिक नेता हैं। हमें इसे ध्यान में रखना होगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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