Anand Mohan : बिहार के सहरसा जेल से गैंगस्टर आनंद मोहन सिंह की रिहाई हो गई है। उनकी रिहाई बुधवार रात तड़के तीन बजे हुई। जेल अधिकारियों ने आनंद मोहन की रिहाई की पुष्टि की है। बिहार सरकार ने जेल नियमों में हाल में बदलाव किया है। जेल नियमों में हुए इस बदलाव से आनंद मोहन सहित 27 दोषियों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ है। 1994 में गोपालगंज के जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या में संलिप्तता पाए जाने पर आनंद मोहन को आजीवन कारावास की सजा हुई।
अठावले ने नीतीश सरकार के फैसले पर उठाया सवाल
आनंद मोहन की रिहाई की लेकंर सियासी घमासान भी मचा हुआ है। इस रिहाई को लेकर नीतीश सरकार भाजपा के निशाने पर है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने बुधवार को कहा कि बिहार सरकार दलित विरोधी है। उन्होंने कहा, 'पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के बिहार सरकार के फैसले का मैं कड़ा विरोध करता हूं। बिहार सरकार का यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है।'
रिहाई के खिलाफ पटना हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर
आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ पटना हाई कोर्ट में बुधवार को एक जनहित याचिका भी दायर की गई। यह अर्जी भीम आर्मी भारत एकता मिशन के बिहार प्रभारी अमर ज्योति की ओर से दायर की गई है। इस अर्जी में आरोप लगाया है कि 'अपराधियों को राहत देने के लिए' नीतीश सरकार ने जेल मैन्यूअल में बदलाव किया है। नीतीश सरकार के इस फैसले के खिलाफ दलित समुदाय में गुस्सा देखा जा रहा है।
जिलाधिकारी की पीट-पीटकर हत्या
साल 1994 में जिलाधिकारी की हत्या देश भर में सुर्खियां बनी थी। डीएम कृष्णैया की कार पर उस समय हमला हुआ जब गैंगस्टर चोटन शुक्ला का जनाजा निकाला जा रहा था। इस जनाजे में आनंद मोहन भी शामिल था। आरोप है कि आनंद मोहन के उकसावे पर ही भीड़ ने डीएम पर हमला किया और उन्हें पीट-पीटकर मार डाला।
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