Galgotias यूनिवर्सिटी को झटका, AI इम्पैक्ट समिट से तुरंत स्टॉल खाली करने को कहा गया, प्रोफेसर बोलीं- हमें जानकारी नहीं
- Edited by: Nitin Arora
- Updated Feb 18, 2026, 12:13 PM IST
Galgotias University in AI Impact Summit: विवाद उस समय शुरू हुआ जब गालगोटिया विश्वविद्यालय ने प्रदर्शनी में 'ओरायन' नाम का 'रोबोट डॉग' प्रदर्शित किया। आलोचकों का कहना था कि यह विश्वविद्यालय का स्वदेशी नवाचार नहीं है बल्कि चीन में बना एक रोबोट है।
Galgotias यूनिवर्सिटी को झटका, AI इम्पैक्ट समिट से तुरंत स्टॉल खाली करने को कहा गया
Galgotias University Row: 'AI समिट एक्सपो' में प्रदर्शित 'रोबोटिक डॉग' को लेकर उठे विवाद के बीच गलगोटिया विश्वविद्यालय (Galgotias University) को अपना स्टॉल तुरंत खाली करने के लिए कहा गया है। इसमें प्रदर्शित रोबोटिक डॉग' पर विश्वविद्यालय के दावों पर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय से तुरंत प्रदर्शनी स्थल छोड़ने को कहा गया।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब गालगोटिया विश्वविद्यालय ने प्रदर्शनी में 'ओरायन' नाम का 'रोबोट डॉग' प्रदर्शित किया। आलोचकों का कहना है कि यह विश्वविद्यालय का स्वदेशी नवाचार नहीं है बल्कि चीन में बना एक रोबोट है। इसके बाद विश्वविद्यालय को सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा।
सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय पर आयातित प्रौद्योगिकी को अपनी बताकर पेश करने के आरोप लगे हैं। विश्वविद्यालय ने हालांकि इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए बयान भी जारी किया।
यूनिवर्सिटी के पास अभी नहीं पहुंची खाली करने की जानकारी
गलगोटिया यूनिवर्सिटी को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो खाली करने के लिए कहे जाने पर, गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. ऐश्वर्या श्रीवास्तव ने कहा, 'अभी तक, हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है।'
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी से AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो खाली करने को कहा है। आरोप है कि इंस्टीट्यूशन ने चीन में बने रोबोटिक कुत्ते को अपनी खोज बताकर पेश किया। यूनिवर्सिटी के डिस्प्ले स्टॉल पर एक चीनी कंपनी का बनाया रोबोट देखे जाने के बाद यूनिवर्सिटी को ऑनलाइन और ऑफलाइन कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा।
इससे पहले, विवाद को लेकर बढ़ते तनाव के बीच, इंस्टीट्यूशन ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ 'प्रोपेगैंडा' को लेकर चिंता जताते हुए एक ऑफिशियल सफाई जारी की। यूनिवर्सिटी ने कहा कि रोबोटिक प्रोग्रामिंग स्टूडेंट्स को AI एप्लिकेशन बनाना सिखाने की उसकी कोशिश का हिस्सा है, जिससे वे दुनिया भर में मौजूद टूल्स और रिसोर्स का इस्तेमाल करके रियल-वर्ल्ड स्किल्स डेवलप और इस्तेमाल कर सकें।
यूनिवर्सिटी ने सफाई में क्या कहा?
बयान में कहा गया, 'हम गलगोटिया में, फैकल्टी और स्टूडेंट्स, अपनी यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रोपेगैंडा कैंपेन से बहुत दुखी हैं। हम साफ तौर पर कहना चाहेंगे कि रोबोटिक प्रोग्रामिंग स्टूडेंट्स को AI प्रोग्रामिंग सिखाने और दुनिया भर में मौजूद टूल्स और रिसोर्स का इस्तेमाल करके रियल-वर्ल्ड स्किल्स डेवलप और इस्तेमाल करने की हमारी कोशिश का हिस्सा है, क्योंकि AI टैलेंट डेवलप करना समय की जरूरत है।'
इंस्टीट्यूशन ने कहा कि उसका विजन स्टूडेंट लर्निंग और इनोवेशन पर फोकस करता है, जिससे स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस पाने और भविष्य के लिए तैयार होने के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी तक एक्सेस मिलता है।
बयान में कहा गया, 'हमारी यूनिवर्सिटी का विजन स्टूडेंट लर्निंग और इनोवेशन पर फोकस है और हम स्टूडेंट्स को मॉडर्न टेक्नोलॉजी तक एक्सेस देते हैं ताकि वे प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस पा सकें और भविष्य के लिए तैयार हो सकें। नेगेटिविटी फैलाने से स्टूडेंट्स का हौसला टूट सकता है, जो ग्लोबल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इनोवेट करने, सीखने और अपनी स्किल्स बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।'
बता दें कि इंडिया AI इम्पैक्ट समिट पांच दिन का प्रोग्राम है जो तीन बेसिक पिलर या सूत्र पर आधारित है: लोग, प्लैनेट और प्रोग्रेस (People, Planet, Progress)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिन नेशनल कैपिटल के भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि AI में देश की प्रोग्रेस न केवल देश के लिए ट्रांसफॉर्मेटिव सॉल्यूशन को शेप देगी बल्कि ग्लोबल एडवांसमेंट में भी कंट्रीब्यूट करेगी।
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