महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मसला गांव के किसान रविंद्र मेटकर की कहानी किसी मिसाल से कम नहीं है। कभी 5 रुपये रोजाना कमाने वाले मेटकर ने खुद की मेहनत और संघर्ष की बदौलत ऐसा मुकाम हासिल किया कि उन्हें ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने एक कार्यक्रम के लिए बुलाया है।
संघर्ष से सफलता तक
मेटकर कभी एक फार्मेसी में काम करते हुए रोज के 5 रुपये और महीने के 150 रुपये कमाते थे, लेकिन रविंद्र मेटकर अब महीने के करीब 17 लाख और साल के करीब 2 करोड़ रुपये कमाते है। महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मसला गांव के रहने वाले 57 वर्षीय किसान अब अगले महीने ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे है, जहां वे यह साझा करेंगे कि कैसे उन्होंने 15 करोड़ रुपये के टर्न ओवर वाला बिजनेस खड़ा किया है।
कब और कहां आयोजित होगा कार्यक्रम?
रविंद्र मेटकर को सतत खेती (सस्टेनेबल फार्मिंग), लागत अनुकूलन, जलवायु के अनुकूल कृषि पद्धतियों और पोल्ट्री उद्यमिता पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह वैश्विक शोध सम्मेलन 'एआई फॉर एवरी माइंड' थीम पर आधारित है, जो 1 से 5 मई तक ऑक्सफोर्ड के सईद कॉलेज में आयोजित होगा।
रविंद्र मेटकर के पिता महाराष्ट्र सरकार में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे। घर में 3 भाई थे। ऐसे में जीवन काफी कठिन था। रविंद्र ने अमरावती विश्वविद्यालय से वाणिज्य में मास्टर्स किया। इसके बाद 1994 में उन्हें पहला बड़ा अवसर मिला, जब उनके रिश्तेदारों ने उनके परिवार को कुछ एकड़ ज़मीन दी। उन्होंने वह जमीन बेच दी और भंडारा जिले में एक एकड़ जमीन खरीद ली।
पोल्ट्री फार्म भी चलाते हैं मेटकर
रविंद्र मेटकर बताते हैं कि मुझे जल्दी ही यह समझ आ गया कि एक किसान बाजार की कीमतों को नियंत्रित नहीं कर सकता, लेकिन वह अपनी लागत कम कर सकता है और उत्पादन बढ़ा सकता है। तभी मैंने अपनी खुद की खाद (फर्टिलाइज़र) बनाना शुरू कर दिया। इस सिद्धांत को एक मॉडल में बदल दिया। आज वे अपने गांव में लगभग 50 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं, जहां आम, मौसंबी, आंवला, केले, सुपारी और अनाज उगाते हैं। वे एक पोल्ट्री फार्म भी चलाते हैं, जहां स्थानीय रूप से तैयार चारा इस्तेमाल किया जाता है और खेत का कचरा खाद के रूप में फिर से उपयोग में लाया जाता है।
उन्होंने कहा, ''मैंने देशभर में 50 लाख से अधिक किसानों का मार्गदर्शन किया है और उनके साथ अपनी तकनीक साझा की है। उन्होंने कहा, ''वे मेरे कृषि मॉडल से प्रेरित होते हैं। अगर मैं 15 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर सकता हूं, तो वे भी कर सकते हैं।'' इससे पहले, रविंद्र मेटकर को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, इनोवेटिव फार्मर अवॉर्ड 2020, फेलो अवार्ड 2021, जगजीवन राम अभिनव पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है और अब रविंद्र के लिए ब्रिटेन जाकर खुद के बारे में दुनिया को बताना वाकई देश के लिए भी गर्व की बात है।
