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उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत की कार हादसे का शिकार, सीने में आई चोट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 25, 2023, 10:20 AM IST

Harish Rawat: यह हादसा उस वक्त हुआ जब हरीश रावत हल्द्वानी से काशीपुर जा रहे थे। उनकी कार डिवाइडर से टकरा गई, जिसमें उनके सीने में चोट आई है। हादसे के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि रावत खतरे से बाहर हैं।

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हरीश रावत

Photo : Twitter

Harish Rawat: उत्तरांखड के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत मंगलवार को हादसे का शिकार हो गए। उनकी कार एक डिवाइडर से टकरा गई, जिसके बाद उन्हें सीने में चोट लगने की खबर है। यह हादसा उस वक्त हुआ जब वह हल्द्वानी से काशीपुर जा रहे थे।

अधिकारियों के अनुसार, चार पहिया वाहन में यात्रा कर रहे रावत के निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) और अन्य सहयोगियों को भी चोटें आईं। उनके हाथ और सिर जख्मी हो गए। वहीं, पूर्व सीएम रावत को हादसे के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सीटी स्कैन और अन्य मेडिकल परीक्षण किए। डॉक्टरों का कहना है कि रावत खतरे से बाहर हैं।

रात 12:15 बजे हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री के साथ यह हादसा रात करीब 12:15 बजे हुआ। एक्सीडेंट के बाद उनको सीने में दर्द की शिकायत हुई। आनन-फानन में उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देकर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। घटना की जानकारी देते हुए सीएम रावत ने कहा कि हल्द्वानी से काशीपुर को आते वक्त बाजपुर में मेरी गाड़ी थोड़ा सा डिवाइडर से टकरा गई तो थोड़े हल्के-फुल्के झटके लगे हैं, तो उसके लिए हॉस्पिटल में चेकअप करवाया और डॉक्टर्स ने सब ठीक बताया है और डिस्चार्ज कर दिया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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