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इतनी महंगी फ्लाईट: दिल्ली से मुंबई जाना दुबई से भी हुआ महंगा, रेट जानकार उड़ जाएंगे होश

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 1, 2023, 04:46 PM IST

Flight Ticket Fare: बुधवार को दिल्ली से मुंबई का किराया इतना था कि लोगों के होश उड़ गए। एक जून के लिए दिल्ली से ​मुंबई का किराया जहां 19 हजार रुपये दिखा रहा था तो वहीं दिल्ली से दुबई की फ्लाईट 14 हजार रुपये में थी।

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Domestic Flight Higher than International Flight

Photo : BCCL

Flight Ticket Fare: देश में घरेलू उड़ानों की कीमतें अचानक से आसमान छूने लगी हैं। किराया इतना बढ़ गया है कि डोमेस्टिक फ्लाईट इंटरनेशनल फ्लाईट से भी ज्यादा महंगी हो गई है। विशेष तौर पर अगर आप 24 घंटे पहले दिल्ली से डोमेस्टिक फ्लाईट बुक करते हैं तो आपको भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ेगी।

दरअसल, बुधवार को दिल्ली से मुंबई का किराया इतना था कि लोगों के होश उड़ गए। एक जून के लिए दिल्ली से मुंबई का किराया जहां 19 हजार रुपये दिखा रहा था तो वहीं दिल्ली से दुबई की फ्लाईट 14 हजार रुपये में थी। ठीक इसी तरह दिल्ली से कोचीन की फ्लाईट का एक जून को किराया 22 हजार रुपये था, तो वहीं कोलकाता से चेन्नई तक का किराया करीब 14 हजार रुपये था।

मुंबई से दूसरे शहरों के फ्लाइट टिकट हुए महंगे

घरेलू उड़ानों के का किराया सिर्फ दिल्ली से उड़ानों का नहीं, बल्कि मुंबई से दूसरे शहरों का किराया भी बढ़ गया। एक जून को मुंबई से लेह के लिए 24 घंटे एडवांस टिकट खरीदने पर 22500 रुपये का टिकट मिल रहा था। वहीं कोच्चि का टिकट 20 हजार रुपये का था।

पूर्वी और उत्तर पूर्वी शहरों का किराया कम

भले ही दिल्ली और मुंबई से कुछ शहरों का किराया अधिक हो, लेकिन पूर्वी और उत्तर पूर्वी शहरों का किराया सामान्य था। मुंबई से कोलकाता के लिए फ्लाइट का किराया 7200 रुपये तो वहीं बागडोगरा के लिए 8300 रुपये का टिकट था। मुंबई से दिल्ली के लिए टिकट 4700 रुपये था।

गो फर्स्ट की उड़ाने बंद होने का असर

घरेलू उड़ानों की कीमतों में अचानक उछाल का बड़ा कारण गो फर्स्ट की उड़ानें बंद होने को माना जा रहा है। दरअसल, गो फर्स्ट ने मई में संचालन बंद कर दिया था, जिससे घरेलू उड़ानों में कमी आई है। दूसरी तरफ मई-जून के महीने में स्कूलों की छुट्टियों के कारण फ्लाइट की मांग में तेजी आती है। ऐसे में मांग अधिक और कम उड़ानों का लोड दूसरी एयरलाइंस पर पड़ रहा है, जिससे दाम बढ़ते जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद यह पहली बार है कि जब फ्लाइट की मांग इतनी ज्यादा बढ़ गई है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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