वक्फ कानून के सपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट में पहली अर्जी दाखिल हो गई है। वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के संसद से पास होने के बाद कई विपक्षी सांसद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं इसे खारिज करने की मांग की है। विपक्ष ने इसे असंवैधानिक बताया है। इन्हीं याचिकाओं के विरोध में अब एक अर्जी दाखिल की गई है, अर्जी में कहा गया है कि कानून सही है, उनका पक्ष भी सुना जाए।
किसने सपोर्ट में दाखिल की है अर्जी
कोर्ट में अखिल भारत हिंदू महासभा के सदस्य सतीश अग्रवाल की ओर से दायर अर्जी में कानून में बदलाव को वाजिब बताया गया है। अर्जी में कानून में बदलाव को चुनौती देने वाली याचिकाओं का विरोध किया है। याचिका में कहा गया कि पुराने कानून का सेक्शन 40 वक़्फ बोर्ड को असीमित अधिकार देता था। इसकी आड़ में वक्फ बोर्ड ने दूसरों की लाखों एकड़ ज़मीन पर कब्जा किया है। इसलिए कानून में बदलाव ज़रूरी था। वकील बरुण कुमार सिन्हा के जरिए दाखिल इस याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि कोर्ट सुनवाई के दौरान उनका भी पक्ष सुने।
वक्फ संशोधन अधिनियम लागू
पिछले सप्ताह संसद द्वारा पारित वक्फ (संशोधन) अधिनियम मंगलवार से लागू हो गया। सरकार ने एक अधिसूचना में यह जानकारी दी। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की धारा 1 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार ने आठ अप्रैल, 2025 से उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू किए हैं। लोकसभा और राज्यसभा ने क्रमशः तीन अप्रैल और चार अप्रैल की मध्य रात्रि के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक पारित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पांच अप्रैल को प्रस्तावित कानून को अपनी मंजूरी दे दी थी।
