Shubhanshu Shukla : भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से सकुशल वापसी हो गई है। आईएसएस में 18 दिन के प्रवास के बाद और करीब 23 घंटे की यात्रा के बाद उनका यान कैलिफोर्निया के सैन डिएगो के समंदर में स्प्लैशडाउन किया। शुक्ला के साथ एक्सिओम-4 मिशन की कमांडर पैगी व्हिट्सन, मिशन विशेषज्ञ पोलैंड के स्लावोज़ उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू भी लौटे हैं। इन्हें लेकर पृथ्वी पर आने वाला ड्रैगन ‘ग्रेस’ अंतिरक्ष यान भारतीय समयानुसार सोमवार शाम 4:45 बजे अंतरिक्ष स्टेशन से सफलतापूर्वक अलग हुआ।
ISS जाने वाले पहले भारतीय हैं शुभांशु
आईएसएस में कदम रखने वाले हैं शुक्ला पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं। एक्सिओम-4 मिशन के तहत शुक्ला तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ बीते 26 जून को आईएसएस पहुंचे थे। आईएसएस में रहते हुए भारतीय वायु सेना में ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने वहां कई वैज्ञानिक प्रयोग किए। आईएसएस का उनका यह अनुभव भारत के गगनयान मिशन में काफी उपयोगी साबित होगा। राकेश शर्मा के बाद शुभांशु अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। रूस के सोयूज मिशन के तहत राकेश 1984 में स्पेस में गए थे।
पुनर्वास में 7 दिन रहेंगे शुभांशु
एक्सिओम-4 के चालक दल की जहाज पर ही कई चिकित्सीय जांच की जाएंगी। इसके बाद वे तट पर आने के लिए एक हेलिकॉप्टर में सवार होंगे। चारों अंतरिक्ष यात्रियों को पुनर्वास में सात दिन बिताने पड़ सकते हैं, क्योंकि उन्हें अंतरिक्ष की कक्षा में अनुभव की जाने वाली भारहीनता के विपरीत, गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में पृथ्वी पर जीवन के लिए खुद को ढालना होगा। चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने सोमवार को एक दूसरे को गले लगाकर और हाथ मिलाकर अनडॉकिंग से लगभग दो घंटे पहले ड्रैगन अंतरिक्ष यान में प्रवेश किया, अपने स्पेससूट पहने और भारतीय समयानुसार अपराह्न 2:37 बजे अंतरिक्ष यान को आईएसएस से जोड़ने वाले हैच को बंद कर दिया।
शुक्ला की आईएसएस यात्रा पर खर्च हुए Rs 550 करोड़
यह शुक्ला के लिए एक ऐतिहासिक यात्रा रही है, जो आईएसएस की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने तथा शर्मा के 1984 में तत्कालीन सोवियत संघ के सैल्यूट-7 अंतरिक्ष स्टेशन के मिशन के तहत अंतरिक्ष उड़ान भरने के बाद अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बने। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने शुक्ला की आईएसएस यात्रा के लिए लगभग 550 करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह एक ऐसा अनुभव है जो अंतरिक्ष एजेंसी को उसके मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, गगनयान की योजना और क्रियान्वयन में मदद करेगा, जिसे 2027 में अंतरिक्ष में भेजे जाने की संभावना है।
