Farooq Abdullah: नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवाद में हैं। फारूक ने जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए भारी सैन्य तैनाती के बावजूद सीमापार से आतंकवादियों की घुसपैठ पर रविवार को सवाल उठाए। अब्दुल्ला ने चेनाब घाटी के किश्तवाड़ जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, (जम्मू-कश्मीर में सीमाओं पर इतनी सेना तैनात है, जो मुझे लगता है कि किसी अन्य देश में नहीं है, लेकिन फिर भी वे (आतंकवादी) इस तरफ घुसपैठ कर रहे हैं। वे सभी हमारे विनाश के लिए एकजुट हैं।
कहा- हमारे कर्नल, मेजर और सैनिक मर रहे हैं
फारूक ने कहा, आतंकवादी, जो लगभग 200-300 हैं, कैसे आए? वे कहां से आए हैं? कोई जिम्मेदार है। कौन मर रहा है - हमारे कर्नल, मेजर और सैनिक। यह सब कैसे हो रहा है? केंद्र सरकार पूरे देश को जवाब देना चाहिए। फारूक अब्दुल्ला का यह बयान शनिवार को 10,000 फीट की ऊंचाई पर अनंतनाग जिले के अहलान गागरमांडू वन क्षेत्र में आतंकवादियों के साथ भीषण मुठभेड़ में सेना के दो जवानों और एक नागरिक के मारे जाने के एक दिन बाद आया है।
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला घाटी के दौरे पर हैं, जिसमें डोडा और रामबन जिले भी शामिल हैं। उनका यह सप्ताहभर का दौरा पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क बनाने और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत तैयारी सुनिश्चित करने के लिए है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के विभिन्न इलाकों से आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ की खबरें आ रही हैं, जिससे लोगों में चिंता बढ़ रही है।
पार्टी के पदाधिकारियों के बीच एकजुटता का आह्वान करते हुए नेकां अध्यक्ष अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता सबसे खराब उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, जिसका मुकाबला केवल एकजुट प्रयासों से ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा, हमें धर्म, क्षेत्र, जाति और पंथ के आधार पर किसी भी भेदभाव के बिना जम्मू कश्मीर के भविष्य के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से एकजुट होना होगा।
गुलाम नबी आजाद की पार्टी ने की आलोचना
इस बीच, गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) ने फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और कहा कि एनसी प्रमुख द्वारा लगाए गए आरोप बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। डीपीएपी के प्रवक्ता अश्वनी हांडा ने कहा, फारूक अब्दुल्ला एक बहुत वरिष्ठ राजनेता हैं और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने भारतीय सेना की बहादुरी पर सवाल उठाया है। यह भारतीय सेना के उन बहादुर सैनिकों के बलिदान पर सवाल उठाने जैसा है जो देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देते हैं।
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