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अरविंद केजरीवाल की फिर टूटी उम्मीदें, अदालत ने 20 अगस्त तक बढ़ाई हिरासत

Delhi Excise Policy Case: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अदालत ने एक बार फिर झटका दिया है। सीएम केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 20 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। आबकारी ‘घोटाला’ मामले में सीबीआई द्वारा दायर चार्जशीट को लेकर अदालत आगामी 12 अगस्त, 2024 को सुनवाई कर सकती है।

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सीबीआई मामले में अरविंद केजरीवाल को झटका, न्यायिक हिरासत 20 अगस्त तक बढ़ी।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Arvind Kejriwal Big Setback: एक बार फिर सीएम केजरीवाल की उम्मीदों पर अदालत ने पानी फेर दिया है। दिल्ली की एक अदालत ने कथित आबकारी घोटाले के सिलसिले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 20 अगस्त तक बढ़ा दी।

चार्जशीट पर 12 अगस्त को कर सकती है विचार

विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत में पेश किये जाने के बाद केजरीवाल की हिरासत अवधि बढ़ा दी। अदालत इस मामले में केजरीवाल के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर पूरक आरोपपत्र पर 12 अगस्त को विचार कर सकती है।

उद्धव ठाकरे ने केजरीवाल की पत्नी से की मुलाकात

इससे पहले शिवसेना (यूटीबी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर जाकर उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल से मुलाकात की। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री के साथ उनके बेटे आदित्य ठाकरे और पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत भी थे। ठाकरे की सुनीता केजरीवाल से मुलाकात के दौरान आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह और राघव चड्ढा भी मौजूद थे। केजरीवाल की आप और ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (‘इंडिया’) की घटक हैं।

मौजूदा हालात, तानाशाही पर हुईं चर्चाएं

संजय सिंह ने कहा, 'वे यहां केजरीवाल की पत्नी, उनके माता-पिता और बेटी से मिलने आए थे। मौजूदा हालात, तानाशाही पर चर्चाएं हुईं। केजरीवाल के मामले में कानून व्यवस्था के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि निचली अदालत का आदेश अपलोड होने से पहले उनकी जमानत पर रोक लगा दी गयी और फिर सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।'

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख विपक्षी गठबंधन के नेताओं से मिलने और महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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