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चुनाव आयोग की राजनीतिक दलों पर बड़ी कार्रवाई, 474 गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों को किया डीलिस्ट

निर्वाचन आयोग ने चुनावी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मुहिम में 474 गैर-मान्यता प्राप्त दलों को डीलिस्ट किया और 359 दलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। दो महीनों में कुल 808 दल सूची से हटाए जा चुके हैं। आयोग ने बताया कि जिन दलों ने लगातार छह साल तक किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लिया, उन्हें डीलिस्ट किया गया है।

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चुनाव आयोग (फाइल फोटो)

चुनाव आयोग ने चुनावी व्यवस्था को और साफ-सुथरा बनाने के अपने अभियान के तहत 474 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) को सूची से हटा दिया है। साथ ही 359 और दलों के खिलाफ डीलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

6 साल तक चुनाव न लड़ने वाले दलों पर कार्रवाई

आयोग ने बताया कि जिन दलों ने लगातार छह साल तक किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लिया, उन्हें डीलिस्ट किया गया है। यह कदम प्रतिनिधित्व अधिनियम कानून 1951 की धारा 29A के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार उठाया गया है।

दो महीने में 808 दल डीलिस्ट किए गए

पहले चरण में 9 अगस्त, 2025 को 334 पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दलों को डीलिस्ट किया गया था। दूसरे चरण में 18 सितंबर को 474 दलों को सूची से हटाया गया। इस तरह दो महीनों में कुल 808 दल डीलिस्ट हो चुके हैं।

359 दलों को भेजे जाएंगे नोटिस

आयोग ने तीसरे चरण में 359 ऐसे दलों की पहचान की है जिन्होंने बीते तीन वित्तीय वर्षों (2021-22, 2022-23, 2023-24) के वार्षिक लेखा-जोखा समय पर जमा नहीं किया और चुनाव खर्च रिपोर्ट भी दाखिल नहीं की। ये दल 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े हैं। अब संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इन दलों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है।

सबसे ज्यादा डीलिस्टिंग उत्तर प्रदेश में

दूसरे चरण में जिन 474 दलों को डीलिस्ट किया गया, उनमें सबसे ज्यादा 121 दल उत्तर प्रदेश के थे। इसके अलावा दिल्ली के 40, महाराष्ट्र के 44, तमिलनाडु के 42, बिहार के 15 , मध्य प्रदेश 23, पंजाब के 21, राजस्थान के 17 और हरियाणा के 17 दल शामिल हैं।

अंतिम निर्णय चुनाव आयोग लेगा

आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दल की डीलिस्टिंग का अंतिम फैसला संबंधित राज्यों से मिली रिपोर्टों पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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