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गेमिंग ऐप विंजो के खिलाफ ईडी की बड़ी कार्रवाई, चार्जशीट में 3,500 करोड़ की अवैध कमाई और गेम मैनिपुलेशन का खुलासा

डी की यह कार्रवाई कई एफआईआर के आधार पर की गई, जो बेंगलुरु, राजस्थान, नई दिल्ली और गुड़गांव में धोखाधड़ी के मामलों में दर्ज थीं। पहले ईडी ने 18 नवंबर 2025 और 30 दिसंबर 2025 को विंजो के कार्यालय, निदेशक के आवास और उनके अकाउंटिंग फर्म के कार्यालय पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। था।

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ईडी (फोटो: एएनआई)

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मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने विंजो प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों पावन नंदा और सौम्या सिंह राठौर के साथ ही इसकी सभी सहायक कंपनियों के खिलाफ विशेष पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दायर की है।

ईडी की यह कार्रवाई कई एफआईआर के आधार पर की गई, जो बेंगलुरु, राजस्थान, नई दिल्ली और गुड़गांव में धोखाधड़ी के मामलों में दर्ज थीं। पहले ईडी ने 18 नवंबर 2025 और 30 दिसंबर 2025 को विंजो के कार्यालय, निदेशक के आवास और उनके अकाउंटिंग फर्म के कार्यालय पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। इन तलाशियों में महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए और लगभग 690 करोड़ रुपए के बैंक बैलेंस, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट और क्रिप्टो वॉलेट फ्रीज किए गए।

विंजो मोबाइल ऐप के जरिए रियल मनी गेम्स संचालित करता है। इसमें 100 से अधिक गेम्स हैं और दावा किया गया कि इसके लगभग 25 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। कंपनी उपयोगकर्ताओं की बेटिंग राशि का एक प्रतिशत कमीशन के रूप में लेती है और प्लेटफॉर्म को सुरक्षित व पारदर्शी बताती है, लेकिन जांच में पता चला कि अधिकांश गेम्स मैनिपुलेटेड थे।

दिसंबर 2023 तक गेम्स में बॉट्स/एआई का इस्तेमाल किया गया और मई 2024 से अगस्त 2025 के बीच कंपनी ने बॉट ऑपरेशन बदलकर निष्क्रिय खिलाड़ियों के डाटा को असली खिलाड़ियों के खिलाफ उपयोग किया, वह भी बिना उनकी जानकारी या सहमति के। इस धोखाधड़ी को छुपाने के लिए बॉट को भ्रमित करने वाले नामों से पेश किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि उपयोगकर्ताओं को छोटे बोनस देकर जीत का अनुभव दिया गया, जिससे उनके मन में भरोसा पैदा हुआ। जैसे-जैसे बड़े दांव पर खेला गया, हार्ड बॉट्स लगाकर उपयोगकर्ताओं को भारी नुकसान कराया गया। इस तरह उपयोगकर्ताओं को 734 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और जब उन्होंने बड़े दांव जीते तो उनकी निकासी रोक दी गई।

इसके अलावा, आरएमजी पर बैन के बाद भी 47.66 करोड़ रुपए को लौटाया नहीं गया। कुल मिलाकर, कंपनी ने 2021-22 से 2025-26 तक लगभग 3522.05 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की, जिससे विशेष रूप से गरीब पृष्ठभूमि वाले उपयोगकर्ताओं को गंभीर वित्तीय और मानसिक संकट का सामना करना पड़ा।

जांच में यह भी पता चला कि कंपनी ने अवैध कमाई को यूएसए और सिंगापुर की शेल कंपनियों के जरिए विदेश भेजा। लगभग यूएसडी 55 मिलियन विदेशी बैंक खातों में भेजे गए और 230 करोड़ रुपए को अन्य सहायक कंपनी में ‘लोन्स फ्रॉम होल्डिंग कंपनी’ के नाम पर डाइवर्ट किया गया। 150 करोड़ रुपए को विदेश भेजने का प्रयास किया गया, लेकिन ऑडिट और प्रमाण पत्र न होने के कारण यह पूरा नहीं हो सका।

ईडी ने अभियोजन याचिका में स्पष्ट किया कि आरोपी जानबूझकर अपराध से अर्जित संपत्ति कमाने, रखने और छुपाने के अपराध में शामिल थे। ऐसे में पीएमएलए की धारा 3, 70 और 4 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है।

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शिव शुक्ला
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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